योगी कैबिनेट

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए योगी कैबिनेट का विस्तार होना अब लगभग तय माना जा रहा है.


UP : योगी कैबिनेट का होगा विस्तार, विधानसभा चुनावों से पहले साधे जा सकते हैं जातीय समीकरण

योगी कैबिनेट का होगा विस्तार

लखनऊ: 

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़े फेरबदल देखने को मिल रहे हैं.

इस क्रम में भाजपा ने यूपी में बड़ा फैसला लिया है. आने वाले दिनों में योगी कैबिनेट का विस्तार होना अब लगभग तय हो गया है.

योगी मंत्रीपरिषद विस्तार को केंद्रीय आलाकमान ने हरी झंडी भी दे दी है.

सूत्रों की मानें तो आने वाले कुछ ही दिनों में मंत्रिपरिषद का विस्तार हो सकता है.

मंत्रि परिषद के इस विस्तार में खाली जगहों को भरा जाएगा. कोरोना महामारी के कारण कुछ मंत्रियों के निधन के बाद से कई पद रिक्त चल रहे हैं. फिलहाल सात मंत्री पद खाली हैं.


उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सियासी और जातीय समीकरण साधने का दांव चल |

जेपी नड्डा और अमित शाह के साथ हुई बैठक में योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार और एमएलसी बनाए जाने के लिए चार नामों पर सहमति बन गई है. यूपी की योगी सरकार |

बता दें कि जितिन प्रसाद ने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था जबकि लक्ष्मीकांत वाजपेयी 2014 के बाद से पार्टी में साइडलाइन चल रहे थे.

लेकिन, बसपा और सपा ब्राह्मण समुदाय की अनदेखी को लेकर योगी सरकार को घेरने में जुट गई है.

ऐसे में बीजेपी अपने ब्राह्मण समीकरण को दुरुस्त करने में जुट गई है, जिसके चलते जितिन प्रसाद की पार्टी एंट्री और अब लक्ष्मीकांत वाजपेयी को दोबारा से सिय |

फायदा से ज्यादा नुकसान का खतरा: यूपी में विधानसभा चुनाव की घोषणा में महज 4 महीने बचे हैं। जानकार मानते हैं कि इतने कम समय के लिए मंत्रिमंडल में बदलाव का पार्टी को कोई खास फायदा नहीं होने वाला है। इसका नुकसान जरुर हो सकता है। सबसे पहले तो चार-पांच महीने में नई जिम्मेदारी मिलने वाले मंत्री के लिए विभाग को समझ पाने में बड़ी मुश्किल होगी। इतने कम वक्त में अपने विभाग के जरिए जनता की मदद नही कर पाएंगे। साथ ही जनता की उम्मीदें भी बढ़ जाएंगी।

नए चेहरों से नाराजगी का डर: फेर-बदल या नए चेहरों को शामिल करने से पार्टी के अंदर कुछ नाराजगी भी संभव है। चुनावी माहौल में इस वक्त पार्टी के अंदर कोई भी गुटबाजी और नाराजगी बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। कुछ नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने से कैबिनेट विस्तार में जगह मिलने की उम्मीद लगाएं बाकी लोग नाराज हो सकते हैं। सरकार का जातीय समीकरण भी बिगड़ सकता है और इसका असर आगमी विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है।

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