नई दिल्ली, 07 सितम्बर 2021, मंगलवार, चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी.जोशी ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय रेल, संचार, इलेक्ट्रोनिक्स एवं सुचना प्रोद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ भेट के दौरान संसदीय क्षेत्र चित्तौड़गढ़ की रेलवे एवं संचार से संबधीत विभिन्न विषयों पर चर्चा की।


यह जानकारी देते हुये सांसद प्रवक्ता रघु शर्मा ने बताया की सांसद सी.पी.जोशी ने केन्द्रीय रेल, संचार तथा इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से संसदीय क्षेत्र में नवीन स्वीकृत बड़ीसादड़ी-नीमच रेलमार्ग के कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी लेते हुये इस कार्य की गति को बढाने का आग्रह किया इसके साथ ही प्रस्तावित दिल्ली-मुम्बई बुलेट ट्रेन जो कि संसदीय क्षेत्र चित्तौड़गढ़ से होकर गुजरनी प्रस्तावित है को लेकर चर्चा की। इस त्वरित रेल सेवा का लाभ उदयपुर-चित्तौड़गढ़ समेत आस-पास के क्षेत्र वासियो को देश की राजधानी दिल्ली एवं आर्थिक राजधानी मुम्बई को जाने हेतु सभी वर्गो को लाभ मिलेगा।

इसके साथ ही सांसद जोशी के प्रयासों से पुर्व में महाराणा प्रताप एवं झाला मन्ना पर डाक टिकिट जारी हो चुका हैं तथा वर्तमान में मेवाड़ के वीर शिरोमणी राव जयमल राठौड़ पर स्वीकृत हुए डाक टिकिट के आगामी 17 सितम्बर को विमोचन कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर चर्चा की तथा डाक टिकिट की स्वीकृती के लिए धन्यवाद दिया।

इसके साथ ही सांसद जोशी ने दशम अवतार भगवान परशुराम जी पर डाक टिकट जारी करने के संबंध संचार मंत्री को बताया की ’’कृष्णन्तो विष्वमार्यम’’ का घोष दसो दिगन्त में गूंजाने वाले महाऋषि जामदास्य श्री परशुराम जी का जन्म दिवस अक्षय तृतीया को हुआ सारस्वत क्षेत्र, कुंभा (काबुल), आदिस्थान (अफगानिस्तान), वाल्मिकी, कष्यप देष (कष्मीर), मुजारत (हिन्दुकुष), गिरीद्वार (खैबर), बल्ज, कपिषा, कंदहार (गान्धार), परशुपुर (पेषावर), रूसरू (रूस), आटवक (अटक), बृद्वग (बिलोचिस्तान), आर्याना (ईरान), शाकद्वरप (षकस्थान), वर्णु (बन्नु), बृजिस्थान (वजीराबाद), पार्थिया (खुराषान), परसुदेष (पर्षिया फारस) एवं कष्सप सागर (केस्पियन सागर) आदि दुर्गन क्षेत्रो में स्वयं जाकर आर्य-अनार्य जनो का राजनितिक-सांस्कृतिक एकीकरण कर ’’कृण्वन्तो विष्वमार्यम’’ के मंत्र को सिद्व किया। जामदस्य परशुराम ने अनेक शास्त्रो की रचना की। शास्त्रो के साथ ही कई ब्रह्मस्त्र, दिव्यास्त्र, रूद्रास्त्र को सिद्व किया। पाशुपत अस्त्र, भुषुण्डी (बन्दुक), शतहनी (तोप) का आविष्कार भगवान श्री परशुराम ने किया, भगवान श्री परशुराम जी ने परवर्ती वाममार्गीय साधना का परिष्कार कर परशुराम तन्त्र विकसित किया। परशुराम सशस्त्र दृष्टि के प्रयोक्ता थे। न दैत्य, न पलायनम परशुराम की इसी सशस्त्र दृष्टि का परिणाम है। दशरथी राम और कृष्ण की तरह जमदास्य राम ने सत्युग व त्रैता के संधिकाल में जनसाधारण एवं जनजातीयो को संगठित कर पापाचारी, उद्ण्डी, आर्य संस्कृति विनाषक हैदयराज कार्तवीर्य सहस्त्राजुन का नाश किया। परशुराम के जन्मदिन वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) से ही सतयुग अवसान व त्रैतायुग का प्रारम्भ माना जाता है। इन्ही कारणों से भगवान परशुराम जी पर डाक टिकीट जारी किये जाने का सांसद जोशी ने केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से आग्रह किया।


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