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संहिता एवं मौलिक सिद्धांत विभाग के अध्यापकों का सीएमई कार्यक्रम

संहिता एवं मौलिक सिद्धांत विभाग के अध्यापकों का सीएमई कार्यक्रम…

आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित, राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ द्वारा समन्वित एवं मौलिक सिद्धांत विभाग, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान-मानद विश्वविद्यालय, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में पूरे भारतवर्ष से पधारे हुए संहिता एवं मौलिक सिद्धांत विभाग के अध्यापकों के सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक ज्ञान के अभिवर्धन हेतु, दिनांक 14 नवंबर 2022 से 19 नवंबर 2022 तक, 6 दिवसीय सीएमई कार्यक्रम का आयोजन किया गया l जिसमें आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र के 12 परम विद्वत् वक्ताओं ने अतिथि व्याख्यान दिये तथा अपनी ज्ञान रूपी गंगा से सभी ज्ञान पिपासु प्रशिक्षणार्थियों को तृप्त किया l

सीएमई प्रोग्राम के प्रथम दिन, दिनांक 14 नवंबर 2022 को पूरे भारतवर्ष से पधारे हुये प्रशिक्षणार्थियों के पंजीकरण एवं किट वितरण के पश्चात्, उनका तिलक के साथ वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा स्वागत किया गया l

कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत संस्थान के प्रथम कुलपति श्रीमान् प्रोफ़ेसर संजीव शर्मा, उप-कुलपति प्रोफेसर मीता कोटेचा, कुलसचिव प्रोफेसर ए रामामूर्ति के उद्बोधन एवं समस्त डीन महोदयों तथा समस्त विभागाध्यक्ष महोदयों की गरिमामय उपस्थिति में की गयी l
उद्बोधन के पश्चात् कुलपति महोदय द्वारा पूरे भारतवर्ष से पधारे हुए प्रशिक्षणार्थियों का औपचारिक परिचय किया गया l

कार्यक्रम के प्रथम सत्र की शुरुआत, प्रोफेसर महेश व्यास, डीन पीएचडी, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली के अतिथि व्याख्यान से की गई l इसके पश्चात् NEIAH के पूर्व निदेशक एवं IMS-BHU के संहिता एवं मौलिक सिद्धांत विभाग में कार्यरत प्रोफ़ेसर प्रदीप कुमार गोस्वामी का अतिथि व्याख्यान हुआ l दोनों ही विद्वत् वक्ताओं ने अपने-अपने अतिथि व्याख्यानों से अपने-अपने विषय में सभी प्रशिक्षणार्थियों के ज्ञान का अभिवर्धन किया l

कार्यक्रम की इसी श्रंखला में दिनांक 15 नवंबर 2022 को कोलकाता के दो प्रसिद्ध विद्वानों, प्रोफेसर अबिचल चट्टोपाध्याय एवं डॉक्टर सुप्रियो चौधरी के आयुर्वेद चिकित्सा के सिद्धांतों के प्रायोगिक दृष्टिकोण को समझने हेतु बहुत ही उत्कृष्ट व्याख्यान हुए l दोनों ही अतिथि वक्ताओं का सभी श्रोताओं ने आभार व्यक्त किया l

दिनांक 16 नवंबर 2022 को प्रोफ़ेसर बीके द्विवेदी एवं प्रोफेसर रामबाबू द्विवेदी के अतिथि व्याख्यान हुये l व्याख्यान के साथ-साथ सभी प्रशिक्षणार्थियों ने विषयों को प्रायोगिक रूप से भी समझा तथा प्रायोगिक रूप से छात्रों को पढ़ाने के प्रोफेसर रामबाबू द्विवेदी के आग्रह का अनुमोदन किया l
तथा प्रोफेसर बीके द्विवेदी ने अपने अतिथि व्याख्यान से सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया l

कार्यक्रम के अगले दिन दिनांक 17 नवंबर 2022 को प्रोफेसर कमलेश कुमार शर्मा का अतिथि व्याख्यान हुआ l जिसमें प्रशिक्षणार्थियों के विषयों से संबंधित समस्त संदेहों को दूर किया गया l
तथा डॉ असित कुमार पांजा के बहुत ही उत्कृष्ट अतिथि व्याख्यान से सभी प्रशिक्षणार्थियों ने आयुर्वेद पांडुलिपि विज्ञान के बारे में सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक रूप से समझा तथा डॉ असित कुमार पांजा द्वारा सभी प्रशिक्षणार्थियों को आयुर्वेद पांडुलिपि विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रेरित किया गया एवं इस आग्रह का सभी प्रशिक्षणार्थियों ने सम्मिलित रूप से अनुमोदन भी किया l

दिनांक 18 नवंबर 2022 को प्रोफेसर अनूप गक्खड़ एवं डॉ उपेंद्र दीक्षित के आयुर्वेद चिकित्सा में बहुत ही उपयोगी एवं प्रायोगिक दृष्टिकोण से छात्रों को पढ़ाने के कौशल के अभिवर्धन हेतु बहुत ही उत्कृष्ट अतिथि व्याख्यान हुये l जिसमें डॉ उपेंद्र दीक्षित ने आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांत- पंचमहाभूत सिद्धांत के प्रायोगिक दृष्टिकोण को बहुत ही सरल एवं सुगम रूप से सभी प्रशिक्षणार्थियों को समझाया l

कार्यक्रम के अंतिम दिन दिनांक 19 नवंबर 2022 को प्रोफेसर निशा गुप्ता द्वारा पदार्थ विज्ञान की प्रायोगिक उपयोगिता को सभी प्रशिक्षणार्थियों को समझाने हेतु अतिथि व्याख्यान दिया गया l
इस ज्ञानरूपी यज्ञ में पूर्णाहुति देने हेतु, पूरे भारतवर्ष में गुरुजी के नाम से विख्यात, आयुर्वेद के परम महर्षि पुनर्वसु आत्रेय स्वरूप, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के पूर्व निदेशक एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के प्रथम कुलपति, प्रोफ़ेसर बनवारी लाल गौड़ के सर्वोत्तम एवं सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने वाले ऐतिहासिक व्याख्यान से इस ज्ञानरूपी यज्ञ की पूर्णाहुति, श्री गुरुजी के कर-कमलों द्वारा की गयी l

कार्यक्रम की औपचारिक समाप्ति सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर तथा कार्यक्रम को 6 दिन तक अनवरत चलाने में सहयोग करने वाले समस्त अधिकारीगण, समस्त पीएचडी एवं एमडी अध्येताओं एवं समस्त कर्मचारीगण के औपचारिक धन्यवाद तथा वैदिक शांति पाठ द्वारा की गयी l औपचारिक धन्यवाद कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ शैलजा भटनागर के द्वारा किया गया l इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने हेतु संस्थान के कुलसचिव महोदय, प्रोफेसर ए रामामूर्ति भी उपस्थित रहे l जिनके आशीर्वचनों से सभी श्रोतागण कृतार्थ हुये l

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