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अगर गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो ….?

अगर गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो ….?

लेखक: सत्य पारीक, वरिष्ठ पत्रकार, जयपुर

जैसी कि इन दिनों राजनीतिक चर्चा है कि गांधी परिवार ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद सौंपने का निर्णय लिया है! ये सच भी हो सकता है क्योंकि गांधी परिवार के आज की तारीख में गहलोत सबसे नजदीकी नेता हैं । किसी समय राहुल गांधी इनकी अनदेखी करते थे क्योंकि सी पी जोशी जैसे नेता गहलोत के खिलाफ उन्हें भड़काया करते थे। लेकिन धीरे धीरे स्थितियां बदली जिसमें जोशी ने अपना खाता राहुल के यहां से स्वंय अपने कर्मो से बंद किया।

राज्य में कांग्रेस की सरकार गिराने की कोशिश भाजपा ने बागी सचिन पायलट को राजनीतिक झांसा देकर कहीं का नहीं छोड़ा । लेकिन गहलोत ने अपनी सरकार सुरक्षित रख कर भाजपा व सचिन को आउट किया वो बड़ी राजनीतिक कुशलता थी । जिसका राजनीतिक लोहा कांग्रेस के कर्ता धर्ता सोनिया गांधी राहुल गांधी व प्रियंका गांधी तक ने माना।

किसी भी राज्य का चुनाव हो गहलोत ने कांग्रेस की अगुवाई की है गुजरात के पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी के दांत खट्टे गहलोत ने ही किये थे। अब फिर से सोनिया ने गुजरात चुनाव की जिम्मेदारी गहलोत को सौंपी है।

गहलोत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो वे मुख्यमंत्री भी रहेंगे ऐसे में पायलट को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए नई पार्टी बनानी होगी। उधर भाजपा में अंदरूनी राजनीति तेज होगी , बक़ौल गहलोत अगर अवसर आया तो मैं वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री बनने में मदद करूँगा के अनुसार वे अपना राजनीतिक भविष्य की बजाय अपने पुत्र के अस्तित्व के लिए अलग पार्टी बनाने को मजबूर होगी । गुजरात चुनाव के बाद गहलोत सबसे पहले डॉ रघु शर्मा को राज्य कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त करेंगे जो भविष्य में उनके उत्तराधिकारी बनेंगे।

क्योंकि शर्मा ही ऐसे नेता हैं जो राजनीतिक रूप में गहलोत के रोम रोम से वाकिफ हैं ये ही गहलोत पुत्र वैभव को राजनीतिक रूप से परिपक्व कर सकते हैं। वैसे इन दिनों वैभव मुख्यमंत्री के आउट ऑफ कंट्रोल होकर रणदीप धनखड़ के साथ कलबों में समय बर्बाद करते देखें जातें हैं।

प्रदेश कांग्रेस की स्थिति बड़ी दयनीय स्थिति में है जिसके प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द डोटासरा ने शिक्षा मंत्री रहते हुए अपने सभी रिश्तेदारों को राज्य प्रशानिक सेवा में चयनित कराया । राज्य की बड़ी जमात सरकारी शिक्षक डोटासरा के नाम से ऐसे चमकते हैं जैसे ” भैंस छाता देखकर ” प्रदेश कांग्रेस का कोई अनुभवी प्रवक्ता तक नहीं है।

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