जयपुर राजस्थान विधानसभा में पर्ची का जिक्र होते ही जमकर लगे ठहाके, घनश्याम तिवाड़ी ने मुख्य सचेतक को किया 'सचेत'

राजस्थान विधानसभा में पर्ची का जिक्र होते ही जमकर लगे ठहाके, घनश्याम तिवाड़ी ने मुख्य सचेतक को किया 'सचेत'

राजस्थान विधानसभा में पर्ची का जिक्र होते ही जमकर लगे ठहाके, घनश्याम तिवाड़ी ने मुख्य सचेतक को किया 'सचेत'

जयपुर।

राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस पार्टी पर्ची का जिक्र करते हुए सूबे की भजनलाल सरकार को अक्सर निशाने पर लेती रहती है। लेकिन आज जब राजस्थान की विधानसभा में पर्ची का जिक्र का हुआ, तो सदन में पक्ष हो या विपक्ष, सभी विधायक और अतिथि जमकर ठहाके लगाकर हंसने लगे। दरअसल राज्यसभा सांसद और पूर्व में राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे घनश्याम तिवाड़ी विधानसभा में आयोजित विधायकों की प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अपनी बात रख रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह पर्ची बड़ी खतरनाक चीज है, जब यह निकलती है तो अच्छे अच्छों के होश उड़ जाते हैं। इसके बाद सदन में जोरदार ठहाके लगे। दरअसल इस पर्ची को भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा से जोड़कर देखा जा रहा है।

घनश्याम तिवाड़ी ने पहले तो नवनिर्वाचित विधायकों को सदन की कार्यवाही और सदन में बरते जाने वाले आचरण को लेकर संबोधित किया। तिवाड़ी ने विधायकों को ज्यादा से ज्यादा समय सदन में बिताने की सीख दी। उन्होंने कहा कि सदन का हर सत्र महत्वपूर्ण होता है। सदस्यों की मौजूदगी जरूरी है। इसके बाद तिवाड़ी ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव को साझा किया। वहीं डिजायर सिस्टम पर बात करते हुए तिवाड़ी ने कहा कि अपने 40 साल के संसदीय जीवन में एक भी डिजायर नहीं की, इसलिए आप काम उसके बिना भी कर सकते हैं। इसके बाद पर्ची के जिक्र पर बोलते हुए कहा कि पर्ची तो बड़ी खतरनाक है, जब भी निकलती है तो होश उड़ जाते हैं, क्योंकि मुझे फिर पर्ची मिल गई, पर्ची के आदेश की पालना मुझे भी करनी होगी, लेकिन आप सभी सदस्य को धन्यवाद देकर कहना चाहूंगा कि कृपा करके विधेयकों को लेकर जब भी सदन में चर्चा हो, उसे ध्यान से सुनें।

वहीं इसी दौरान जब घनश्याम तिवाड़ी को सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग सदन में आंख बंद किए हुए नजर आए तो उन्होंने उनसे कहा कि अगर सचेतक ही सदन में सोएगा तो फ्लोर कैसे संभलेगा ? इस पर मुख्य सचेतक गर्ग ने कहा कि मैं सो नहीं रहा था, ध्यान कर रहा था। इस पर तिवाड़ी ने फिर गर्ग से पूछा कि क्या भोजन ज्यादा खा लिया क्या ? इस पर भी सदन में जमकर ठहाके लगे।

गौरतलब है कि पर्ची का जिक्र राजस्थान की राजनीति में भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से शुरू हुआ है। 12 दिसंबर को मुख्य पर्यवेक्षक के रूप में राजनाथ सिंह ने विधायक दल बैठक में मुख्यमंत्री के नाम की पर्ची निकाली और वो प्रस्तावक के रूप में सीएम का नाम रखने के लिए पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को सौंपी थी। उस समय का यह वीडियो भी खूब सोशल मीडिया में सुर्खियों में रहा था, जिसमें राजे ने पर्ची में नाम देखने बाद अचंभित होकर राजनाथ सिंह की तरफ देखा था। उसके बाद से पर्ची का जिक्र प्रदेश की सियासत में लगातार होता रहा है, विपक्ष ने तो कई बार सरकार को ही पर्ची की सरकार बताते हुए हमला बोला है।

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