rajasthan jaipur विधानसभा उपचुनाव से पहले भारत आदिवासी पार्टी में बिखराव, निकाले 8 नेता

विधानसभा उपचुनाव से पहले भारत आदिवासी पार्टी में बिखराव, निकाले 8 नेता

विधानसभा उपचुनाव  से पहले भारत आदिवासी पार्टी में बिखराव,  निकाले 8 नेता

जयपुर। राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारत आदिवासी पार्टी (BAP) में बिखराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शनिवार को पार्टी ने अपने आठ नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।  गौरतलब है कि भारतीय ट्राइबल पार्टी से अलग होकर बनी भारत आदिवासी पार्टी ने इस बार के लोकसभा चुनाव में एक सीट पर जीत हासिल की थी।  पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन आठ पदाधिकारियों को लगातार अनुशासनहीनता करने और लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के कारण बाहर किया गया है। इस निर्णय के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह और अधिक बढ़ने की संभावना है, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों में BAP की रणनीति और स्थिति पर असर पड़ सकता है।  पार्टी नेतृत्व ने यह कदम संगठन में अनुशासन और एकता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया है, ताकि पार्टी चुनावी तैयारियों में किसी भी तरह की बाधा से बच सके।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने 8 नेताओं को निकाला: शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन लाल रोत ने पत्र जारी किया, जिसमें पार्टी विरोधी काम करते हुए समांतर संगठन बनाने के लिए विरोधी लोगों से संपर्क करने, निरंतर सौदेबाजी में संलग्न रहने, सांठ-गांठ करने की पुख्ता जानकारी मिलने, सुधरने एवं व्यवहार परिवर्तन का पर्याप्त अवसर देने पर भी समाज अहित में व्यस्त रहने को लेकर दी गई अनुशासन समिति की रिपोर्ट पर बांसवाड़ा जिले के 8 पदाधिकारियों को पार्टी की सदस्यता से तत्काल प्रभाव निलंबित किया गया। 

निलंबित होने वाले सदस्य: मणिलाल गरासिया, दिनेश डाबी, राकेश डिंडोर, मुकेश राणा,राजू राणा, नारायण बामणिया, पवन बुझ, तेजकरण मईडा को निकाला गया है।  इन नेताओं को पार्टी से निलंबित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि अब भविष्य में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का इन आठ व्यक्तियों से कोई संबंध नहीं है। 

नाम को लेकर विरोधाभास: एक तरफ जहां भारत आदिवासी पार्टी के नव निर्वाचित सांसद राजकुमार रोत और अन्य पदाधिकारी अलग भील प्रदेश की मांग को बुलंद करने की बात कर रहे हैं तो पार्टी से निकाले गए पदाधिकारी इसका नाम जांबूखंड प्रदेश रखने की बात कह रहे हैं. इसको लेकर पिछले कुछ दिनों ने सोशल मीडिया पर "पोस्ट वार" चल रहा है. इसके बाद ही भारत आदिवासी पार्टी ने यह कदम उठाया है।

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