जयपुर लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का दलित दांव, टीकाराम जूली को बनाया नेता प्रतिपक्ष

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का दलित दांव, टीकाराम जूली को बनाया नेता प्रतिपक्ष

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का दलित दांव, टीकाराम जूली को बनाया नेता प्रतिपक्ष

जयपुर।

राजस्थान विधानसभा में आखिरकार नेता प्रतिपक्ष की दौड़ खत्म हो गया है। कांग्रेस ने पूर्व कैबिनेट मंत्री टीकाराम जूली को सीएलपी लीडर और नेता प्रतिपक्ष बनाया है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि पीसीसी चीफ के पद पर गोविंद सिंह डोटासरा ही बने रहेंगे। जानकारी के मुताबिक ओबीसी जाट वर्ग से आने वाले गोविंद सिंह डोटासरा शुरुआत से ही नेता प्रतिपक्ष पद की दौड़ में काफी आगे चल रहे थे। लेकिन ऐन वक्त पर कांग्रेस हाईकमान ने डोटासरा को उनके मौजूदा पद पर ही बरकरार रखते हुए टीकाराम जूली को ये अहम जिम्मा देने का फैसला किया है।

वहीं नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर टीकाराम जूली ने अपनी प्रतिक्रिया दी। एक बयान में उन्होंने कांग्रेस आलाकमान का आभार जताते हुए कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के लिए पार्टी के अनुभवी बड़े नेताओं के अनुभव का भी लाभ लेंगे। उन्होंने कहा कि हम विधानसभा के अंदर विपक्ष में रहते हुए जनता की लड़ाई लड़ेंगे। जूली ने प्रदेश की भजनलाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने हमारे सभी कामों पर रोक लगा दी है। भाजपा केवल दिखावा कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। उन्होंने फिर जोर देते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज के रूप में प्रदेश की जनता की आवाज सदन के अंदर गूंजेगी।

जानकारों का मानना है कि करीब 3 महीने बाद ही लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी इतने बड़े चुनाव से पहले पार्टी संगठन में किसी तरह का बदलाव नहीं चाहती थी। इसीलिए डोटासरा को पीसीसी चीफ के पद पर बरकरार रखा गया है। वहीं लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर जहां प्रदेश के सवर्ण वर्ग को साधने की कोशिश की, वहीं कांग्रेस ने दलित मतदाताओं को बड़ा मैसेज देने के मकसद से टीकाराम जूली को नेता प्रतिपक्ष बनाया है। वहीं वे प्रदेश के युवा विधायकों में भी शुमार किए जाते हैं।

वहीं टीकाराम जूली के सियासी सफ़र की बात करें, तो वे तीसरी बार अलवर ग्रामीण सीट से राजस्थान विधानसभा में पहुंचे हैं। इससे पहले वे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग का जिम्मा संभाल चुके हैं। वहीं यह पहला मौका है जब कांग्रेस ने किसी दलित चेहरो को नेता प्रतिपक्ष जैसा अहम पद सौंपा है। वहीं वे पूर्व में अलवर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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