बाड़मेर। चुनावी रण- 2023: चौहटन विधानसभा सीट की चर्चा, हादी परिवार का यह फैसला

चुनावी रण- 2023: चौहटन विधानसभा सीट की चर्चा, हादी परिवार का यह फैसला

चुनावी रण- 2023: चौहटन विधानसभा सीट की चर्चा, हादी परिवार का यह फैसला

कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों का जीत का दावा, हादी परिवार का पदमाराम को सहयोग।

बाड़मेर। जिले की चौहटन विधानसभा सीट 2008 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई, यहां पर नेताओं ने कई बार पाला बदला और अलग-अलग पार्टियों की टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बने हैं, चौहटन विधानसभा का ज्यादातर  क्षेत्र बॉर्डर से सटा हुआ है। यह सीट साल 1957 में अस्तित्व में आने के बाद 14 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें से 8 बार कांग्रेस, दो बार बीजेपी और चार बार अलग-अलग दलों के विधायक चुने गए, इस सीट से कांग्रेस पार्टी के वली मोहम्मद पहले विधायक चुने गए थे. 2008 में इस सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गया है और 2008 में कांग्रेस के पदमाराम मेघवाल विधायक बने, तो 2013 के चुनाव में बीजेपी से पाक विस्थापित तरुण रॉय कागा ने कांग्रेस के पदमाराम मेघवाल को हराया और विधानसभा पहुंचे थे, वहीं 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पदमाराम मेघवाल एक बार फिर विधायक चुने गए। 2023 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने पदमाराम को फिर प्रत्याशी बनाया और भाजपा ने आदूराम मेघवाल को टिकट दी।

चौहटन विधानसभा सीट पर दल बदलने वाले नेताओं का दबदबा रहा है, यहां पर नेताओं ने कई बार पाला बदला और अलग-अलग पार्टियों की टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बने हैं।  अब तक सबसे ज्यादा 6 बार जीत हासिल करने वाले  मरहूम अब्दुल हादी ने पहले निर्दलीय चुनाव जीता, फिर वह 1972 में कांग्रेस में शामिल हो गए, फिर उन्होंने 1985 में लोक दल से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, 1990 में जनता दल में शामिल हुए और जीत हासिल कर विधायक बने, 1998 में वह एक बार फिर कांग्रेस में आ गए और कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरकर जीत हासिल की, अब्दुल हादी की तरह 1980 में कांग्रेस की टिकट से जीतने वाले भगवान दास डोसी बाद में निर्दलीय चुनाव लड़े और जीतकर विधानसभा तक पहुंचे।  इतना ही नहीं, 1993 में बाड़मेर से निर्दलीय विधायक चुने गए गंगाराम चौधरी ने 2003 में बीजेपी के टिकट पर चौहटन विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के अब्दुल हादी को हराया। चौहटन विधानसभा क्षेत्र से ही गुजरात की सीमा प्रारंभ होती है। चौहटन सीट पर  मुस्लिम, जाट, बिश्नोई और एससी एसटी के मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। चौहटन विधानसभा सीट पर अब्दुल हादी परिवार का दबदबा हैं। 2008 में सीट आरक्षित होने पर अब्दुल हादी ने ग्राम सेवा सहकारी समिति में व्यवस्थापक के रूप में कार्य कर रहे पदमाराम मेघवाल को कांग्रेस की टिकट दिलाई, भाजपा के उम्मीदवार तरुण राय कागा को हराकर पदमाराम पहली बार विधायक बने। उसके बाद 2013 के चुनाव में तरुण राय कागा ने पदमाराम को हराया। इस सीट पर कांग्रेस को जीत दिलाने वाले अब्दुल हादी परिवार का खासा प्रभाव हैं। मरहूम अब्दुल हादी के पुत्र गफूर अहमद और पुत्रवधु शमा बानो दोनों राजनीति में सक्रिय हैं, गफूर अहमद 2018 की गहलोत सरकार में श्रम सलाहकार बोर्ड में अध्यक्ष रहे और राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त थे। शमा बनो वर्तमान में प्रधान हैं, पहले चौहटन कीं प्रधान रह चुकीं हैं, शमा बानो ने हाल में शिव विधानसभा से टिकट माँगा लेकिन टिकट अमीन खान को मिला, चौहटन विधानसभा सीट को जीताने के लिए पदमाराम के साथ अब्दुल हादी परिवार काफी मेहनत कर रहे है। हालाँकि काफी समय पदमाराम से हादी परिवार की नाराजगी रही। चुनाव चरम पर आने पर पदमाराम ने हादी परिवार को मना लिया चौहटन में कांग्रेस एक जुट होकर चुनाव लड़ रही है उधर भाजपा की भी तैयारी कमजोर नहीं हैं भाजपा के आदु राम मेघवाल कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने के प्रयास कर रहे है। कांग्रेस इस बार चौहटन सीट ज्यादा मार्जिन से जीतने का दावा कर रही है।

 

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