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पिछले दिनों दिल्ली जो हुआ अब सामने आया, प्रियंका – पायलट की रणनीति फेल हो गई !

पिछले दिनों दिल्ली जो हुआ अब सामने आया, प्रियंका – पायलट की रणनीति फेल हो गई !

सूत्रों के हवाले से खबर…..

सत्य पारीक एवं रहमतुल्लाह खान

दिल्ली। प्रियंका गांधी अपने ” जादू अंकल अशोक गहलोत ” के साथ साथ अपनी मां–भाई का राजनीतिक भरोसा खो चुकी है इसी कारण वह कहीं नज़र नहीं आती है । ताजा तरीन मामला है पार्टी के बागी रहे सचिन पायलट को जोर जबर्दस्ती तरीके से मुख्यमंत्री बनवाने की और गांधी परिवार के वफादार अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटवाने का प्रयास किया। जिन्हें सोनिया गांधी पार्टी का अध्यक्ष बनाना चाहती थी । लेकिन प्रियंका गांधी ने दिग्गी राजा दिग्गविजय सिंह से मिलकर राहुल गांधी को विश्वास में लेकर ऐसा निर्णय कराया कि गहलोत को अध्यक्ष पद से फेल करने की कोशिश की लेकिन गहलोत सब माजरा समझ गए इसलिए उन्होने अध्यक्ष चुनाव लड़ने से मना किया। साथ ही गहलोत को सीएम पद से हटाने की कोशिश की। लेकिन गहलोत ठहरे राजनीति के जादूगर खिलाड़ी जिन्होंने अपने विश्वसनीय मन्त्रियों व विधायकों से मिलकर सारी योजना का बंटाधार करा दिया।

प्रियंका गांधी ने जब बागी हुए पायलट को वापिस पार्टी में लौटने की वकालत की थी । तब राहुल गांधी ने पायलट से बात ही नहीं की थी । गहलोत ने भी विरोध किया और प्रदेशाध्यक्ष पद व उपमुख्यमंत्री के पद से हटाने की आलाकमान को सिफारिश कर दी थी कि पायलट को पार्टी से निकाल दें । प्रियंका गांधी ने तब भी गहलोत पर दबाव डाला था कि पायलट को दोंनो पदों पर बहाल किया जाए , मग़र गहलोत ने इंकार कर दिया । जिससे प्रियंका अपने जादू अंकल से नाराज हो गई थी जिसका राजनीतिक प्रतिशोध अब लिया है ।

प्रियंका गांधी ने ही पंजाब में मुख्यमंत्री पद से कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने का निर्णय नवज्योत सिंह सिधु के कहने से लिया था । लेकिन सोनिया गांधी ने सिधू की बजाय चनी को मुख्यमंत्री बना दिया । कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद वहां पार्टी का सफाया हो गया । इसी तरह से प्रियंका गांधी के गैर अनुभवहीनता के कारण उत्तर प्रदेश में पार्टी की जो दुर्गति हुई है वो इतिहासिक है । इसी कारण प्रियंका को उत्तरप्रदेश से पार्टी का डेलीगेट तक नहीं बनाया है।

राहुल गांधी ने जब भारत जोड़ो यात्रा शुरू की तब वहां प्रियंका नहीं थी और जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने अध्यक्ष का नामांकन पत्र दाखिल किया तो महासचिव होने के कारण प्रियंका वहां नहीं थी । राहुल गांधी की पद यात्रा को 25 दिन हो गये लेकिन प्रिंयका आजतक उसमें शामिल नहीं हुई । प्रियंका के खास माने जाने वाले राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अजय माकन जो गहलोत को हटाने की साजिश में शामिल थे उनसे सोनिया गांधी नाराज है राजस्थान को लेकर माकन और खड़गे ने रिपोर्ट अलग अलग दी थी। माकन की रिपोर्ट पर खड़गे ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। इसलिए माकन और खड़गे ने अलग अलग रिपोर्ट दी । एक सूत्र ने बताया कि सोनिया, खड़गे, दिग्विजय और राहुल वीसी के जरिये की एक बैठक की थी । जिसमें सोनिया गांधी ने कहा गहलोत को हटाना आसान नहीं है उनके बिना राजस्थान की सरकार नहीं चल सकती।

प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की जिद्द की वजह से सारा बखेड़ा हुआ है। गहलोत के खिलाफ रची साजिश का खुलासा होने के बाद राहुल गांधी शांत हो गए , लेकिन प्रियंका गांधी अभी भी पायलट के पक्ष में हैं। पायलट की विधायकों से लॉबिंग के प्रयास अभी भी जारी है। प्रियंका गांधी ने राजस्थान के एक वरिष्ठ काग्रेस नेता को कहा है कि पायलट के पास सिर्फ 10 विधायक है अभी और लॉबिंग करनी पड़ेगी। इस बीच प्रियंका गांधी को अपने भाई और मां की तरफ से उनको विदेश जाने का इशारा भी हुआ।

एक सूत्र ने बताया कि काग्रेस अध्यक्ष चुनाव के बाद सबसे पहले माकन को हटाया जाएगा। माकन के जयपुर से दिल्ली जाने के बाद जब पहली दफा सोनिया गांधी से मिले तो उनको तुरंत रवाना किया और कहा रिपोर्ट मेल कर दें आने की जरूरत नहीं है ज्ञात रहे माकन राजस्थान के पहले भी असफल प्रभारी रह चुके है ।

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