नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 137वें में देशवासियों से संवाद किया। इस बार कार्यक्रम में इतिहास, युवा, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता, खेती, विज्ञान और स्थानीय स्तर पर बदलाव ला रहे लोगों की कहानियों पर खास जोर रहा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने मुंबई के कृष्णा शेषाद्री से फोन पर बातचीत भी की, जिन्होंने भारतीय इतिहास को तकनीक की मदद से आसान और रोचक बनाने के लिए एक अनोखी वेबसाइट तैयार की है।
कृष्णा शेषाद्री की बनाई वेबसाइट BharatRajya.com की खासियत यह है कि इसमें यूजर किसी एक वर्ष को चुनकर यह देख सकता है कि उस समय भारत के अलग-अलग हिस्सों में कौन-से शासक या राजवंश सत्ता में थे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास को इस तरह प्रस्तुत करने से उसे समझना और उसमें रुचि लेना ज्यादा आसान हो सकता है। उन्होंने कृष्णा के प्रयास को देशवासियों के सामने रखने के लिए उनसे सीधे बातचीत करने का फैसला किया।
कृष्णा ने बातचीत में बताया कि वह न तो इतिहास के शिक्षक हैं और न ही पेशेवर टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ। उनका मूल पेशा इंजीनियरिंग रहा है, जिसके बाद उन्होंने MBA किया और मार्केटिंग के क्षेत्र में काम किया। हालांकि बचपन से ही इतिहास में उनकी गहरी रुचि रही। इसी रुचि ने उन्हें यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि भारतीय इतिहास को किताबों के पारंपरिक तरीके से अलग किस तरह कहानी और तकनीक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
कृष्णा ने बताया कि उन्हें हमेशा लगता था कि इतिहास को केवल तारीखों और घटनाओं की सूची के रूप में देखने के बजाय उसे एक कहानी की तरह समझना चाहिए। इसी विचार से उन्होंने वेबसाइट तैयार की। इसमें अलग-अलग समय को चुनकर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में शासन करने वाले राजवंशों की जानकारी देखी जा सकती है। वेबसाइट का उद्देश्य इतिहास को ज्यादा accessible और engaging बनाना है।
प्रधानमंत्री ने कृष्णा के इस काम को खास तौर पर इसलिए भी सराहा क्योंकि इसमें तकनीक और इतिहास का मेल देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास युवाओं और नई पीढ़ी को भारत के अतीत से जोड़ने में मदद कर सकते हैं। इतिहास को डिजिटल माध्यम से समझने का यह तरीका छात्रों और सामान्य पाठकों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही युवाओं से नशे के खिलाफ अभियान को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य स्पष्ट है—नशामुक्त युवा और ड्रग-फ्री भारत। प्रधानमंत्री ने युवाओं, कंटेंट क्रिएटर्स, कलाकारों और समाज के दूसरे वर्गों से नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए नए स्लोगन, गाने, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। ऐसे में नशे की लत से जूझ रहे लोगों की मदद करना और युवाओं को इससे दूर रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने नशामुक्ति के लिए काम कर रहे लोगों और विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी की सराहना भी की।
कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने PM स्वनिधि योजना के जरिए छोटे कारोबार को आगे बढ़ा रही महिलाओं की कहानियां साझा कीं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, योजना के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और देशभर में लगभग 35 लाख महिलाएं इससे जुड़कर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं।
प्रधानमंत्री ने गाजियाबाद की बबीता शर्मा का उदाहरण दिया, जो पहले सड़क किनारे पूजा सामग्री का छोटा स्टॉल लगाती थीं। योजना से आर्थिक मदद मिलने के बाद उन्होंने अपने स्टॉल पर सामान बढ़ाया, कारोबार का विस्तार किया और धीरे-धीरे उनका छोटा स्टॉल दुकान में बदल गया। इसी तरह बेंगलुरु की टी.एस. निन्गम्मा का भी जिक्र हुआ, जिन्होंने अपने पति के साथ इडली, डोसा और सांभर का कारोबार शुरू किया था। आर्थिक मदद मिलने के बाद उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार किया और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया।
प्रधानमंत्री ने इन उदाहरणों के जरिए कहा कि जब किसी महिला का छोटा कारोबार आगे बढ़ता है तो उसका फायदा केवल उस महिला तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवार की आय बढ़ती है, बच्चों की पढ़ाई बेहतर होती है और महिला का आत्मविश्वास भी मजबूत होता है। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण का जमीनी और व्यावहारिक उदाहरण बताया।
‘मन की बात’ में स्वच्छता से जुड़े स्थानीय प्रयासों को भी जगह मिली। प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के रामपुर के पटवाई गांव का उदाहरण दिया, जहां युवाओं ने अपने आसपास की गंदगी को साफ करने की पहल की। उन्होंने कहा कि जब स्वच्छता किसी सरकारी अभियान के बजाय स्थानीय लोगों का अपना संकल्प बन जाती है, तो उसका असर सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे इलाके की पहचान बदलने लगती है।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। ओडिशा के देब्रीगढ़ क्षेत्र की मैथिली भुए की कहानी बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगल से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर रहने से लेकर इको-टूरिज्म और वन संरक्षण से जुड़ने तक का उनका सफर दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बना है। आज कई महिलाएं जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ इको-टूरिज्म गतिविधियों में योगदान दे रही हैं।
विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने Mission ShaktiSAT का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस पहल के जरिए 108 देशों की छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक और विज्ञान से जुड़े क्षेत्रों को समझने का अवसर मिल रहा है। इसके अलावा उन्होंने खेती में नए प्रयोगों, खासकर भारत में एवोकाडो की बढ़ती खेती और बाजार में उसकी संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के आसपास देशभर में हुए तिरंगा अभियानों का भी जिक्र किया और कहा कि तिरंगे ने भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले भारतीयों को भी जोड़ा। उन्होंने नागरिकों की भागीदारी को देश की सामूहिक भावना की ताकत बताया।
इस पूरे एपिसोड में एक बात लगातार नजर आई—बड़े बदलाव की शुरुआत कई बार किसी बड़े संस्थान से नहीं, बल्कि किसी एक व्यक्ति के छोटे से प्रयास से होती है। मुंबई के कृष्णा शेषाद्री का इतिहास को डिजिटल तरीके से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास इसका एक उदाहरण है। इसी तरह महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का कारोबार बढ़ाना, गांवों में युवाओं का स्वच्छता अभियान और नशे के खिलाफ युवाओं की भागीदारी भी छोटे स्तर से शुरू होकर व्यापक सामाजिक बदलाव की दिशा में बढ़ते कदम हैं।
कृष्णा शेषाद्री की कहानी इस मायने में खास है कि उन्होंने अपने पेशे से अलग एक विषय में रुचि को काम में बदला और तकनीक की मदद से इतिहास को लोगों के लिए अधिक सरल बनाने की कोशिश की। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में उनके काम को सामने रखना इस बात का संकेत भी है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में व्यक्तिगत स्तर पर किए जा रहे ऐसे प्रयोग राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।