Jaipur : राजस्थान निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद भाजपा के भीतर शुरू हुई बगावत के खिलाफ पार्टी का अनुशासन अभियान लगातार जारी है। भाजपा ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने वाले 7 और नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। ताजा कार्रवाई में अजमेर के पांच, जैतारण के एक और नागौर के मूंडवा से एक बागी नेता शामिल है। इन सात नेताओं पर कार्रवाई के बाद निकाय चुनाव में पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वाले नेताओं के खिलाफ भाजपा के एक्शन का आंकड़ा 48 तक पहुंच गया है।
इससे पहले भाजपा ने निकाय चुनाव में अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने और पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करने वाले 41 नेताओं को छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया था। अब सात और नेताओं पर कार्रवाई के बाद भाजपा ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि टिकट नहीं मिलने या पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी से असहमति के बावजूद निर्दलीय चुनाव लड़ना संगठन में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं मुख्यालय प्रभारी श्रवण सिंह बगड़ी की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, संबंधित नेता निकाय चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे। पार्टी ने इसे संगठन विरोधी गतिविधि और गंभीर अनुशासनहीनता माना है। प्रदेशाध्यक्ष के निर्देश पर इन नेताओं की प्राथमिक सदस्यता छह साल के लिए समाप्त करने की कार्रवाई की गई है।
ताजा कार्रवाई में अजमेर नगर निगम क्षेत्र के पांच नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें वार्ड 38 से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पूर्व पार्षद एवं मंडल अध्यक्ष अरुण शर्मा, वार्ड 41 की पूर्व पार्षद नीतू मिश्रा और वार्ड 52 से चुनाव मैदान में उतरीं महिला मोर्चा की पूर्व जिला अध्यक्ष सीमा गोस्वामी शामिल हैं। इसके अलावा वार्ड 74 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहीं पूर्व पार्षद रूबी जैन और वार्ड 75 से चुनाव मैदान में उतरे पूर्व पार्षद धर्मेंद्र सिंह चौहान (पंचम) पर भी छह साल के निष्कासन की कार्रवाई की गई है।
अजमेर के अलावा भाजपा ने जैतारण नगर पालिका के वार्ड 17 से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पूर्व पार्षद राकेश सोलंकी को भी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया है। वहीं नागौर जिले की मूंडवा नगर पालिका के वार्ड 8 से बागी प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश मंत्री लक्ष्मी नारायण मुंडेल पर भी पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
भाजपा ने इससे पहले 7 सितंबर को प्रदेशभर में बागी नेताओं के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया था। उस कार्रवाई में 41 नेताओं को छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया गया था। इनमें सबसे ज्यादा 26 नेता जयपुर से थे। जयपुर की सूची में पूर्व पार्षदों के अलावा मंडल पदाधिकारी, वार्ड अध्यक्ष, महिला मोर्चा और किसान मोर्चा से जुड़े पदाधिकारी भी शामिल थे।
भाजपा की ओर से लगातार हो रही इस कार्रवाई के पीछे निकाय चुनाव में संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश मानी जा रही है। टिकट वितरण के बाद पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने का रास्ता चुना था। ऐसे में चुनाव के बीच लगातार निष्कासन के जरिए भाजपा नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी तय होने के बाद उसके खिलाफ चुनाव लड़ना या उसके विरोध में काम करना संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन माना जाएगा।
राजस्थान में निकाय चुनाव के दौरान टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों में बगावत की स्थिति देखने को मिली है। भाजपा ने अपने बागी नेताओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर संगठन में अनुशासन का संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी नेतृत्व की ओर से पहले ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में एकजुट होकर काम करने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में चुनाव के बीच हो रहे लगातार निष्कासन को भाजपा की डैमेज कंट्रोल और संगठनात्मक अनुशासन की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
फिलहाल, ताजा कार्रवाई के बाद राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई का दायरा बढ़कर 48 नेताओं तक पहुंच गया है। पार्टी की ओर से की गई कार्रवाई संगठन के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने और पार्टी लाइन से अलग जाने वाले नेताओं के खिलाफ है। संबंधित नेताओं की ओर से इस निष्कासन पर कोई प्रतिक्रिया सामने आती है तो उसे भी आगे की खबर में शामिल किया जा सकता है।