महाबलेश्वर की ‘बगीचा’ रेस्त्रां मालकिन कुल्शुम मुलानी से मिले अशोक गहलोत, 58 साल की संघर्ष गाथा को बताया प्रेरणा की मिसाल

News Desk

महाराष्ट्र के सतारा जिले के महाबलेश्वर प्रवास के दौरान राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक ऐसी शख्सियत से मुलाकात की, जिनकी जिंदगी मेहनत, आत्मनिर्भरता और लगन की अनोखी कहानी बयां करती है। यह शख्सियत हैं 86 वर्षीय श्रीमती कुल्शुम युनुस मुलानी, जो महाबलेश्वर के मशहूर ‘बगीचा’ रेस्त्रां की मालकिन हैं और आज भी खुद खड़े होकर रेस्त्रां मैनेज करती हैं।

गहलोत ने X पर लिखा कि महाबलेश्वर दौरे के दौरान उन्हें प्रसिद्ध ‘बगीचा’ रेस्त्रां जाने का अवसर मिला। वहां उन्हें जानकारी मिली कि रेस्त्रां की मालकिन 86 साल की उम्र में भी खुद रोज़ रेस्त्रां संभालती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी सक्रियता और ज़ज्बा देखकर गहलोत इतने प्रभावित हुए कि वे अगली ही बार विशेष तौर पर उनसे मिलने दोबारा ‘बगीचा’ रेस्त्रां पहुंच गए।

श्रीमती कुल्शुम मुलानी न सिर्फ उम्र को मात देती दिखती हैं, बल्कि उनकी बुलंद आवाज और आत्मविश्वास युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। वे खुद ग्राहकों से बातचीत करती हैं, रेस्त्रां के संचालन पर सीधी नज़र रखती हैं और हर चीज़ में दिलचस्पी लेती हैं। गहलोत ने इसे एक जीती-जागती मिसाल बताया कि अगर हौसला मजबूत हो तो उम्र कभी रुकावट नहीं बनती।

श्रीमती मुलानी ने गहलोत से बातचीत में अपने संघर्ष के शुरुआती दिनों का ज़िक्र भी किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में वे महाबलेश्वर में स्ट्रॉबेरी की खेती किया करती थीं। बाद में 1968 में एक छोटे से स्टॉल से उन्होंने अपना सफर शुरू किया। यही छोटा सा मक्का और स्ट्रॉबेरी वाला स्टॉल आगे चलकर ‘बगीचा’ रेस्त्रां के रूप में विकसित हुआ।

आज ‘बगीचा’ रेस्त्रां महाबलेश्वर की पहचान बन चुका है। यहां की ‘स्ट्रॉबेरी विद क्रीम’, ‘कॉर्न पेटीज’ और ‘मलबेरी क्रीम’ खास तौर पर मशहूर हैं और पर्यटक इन स्वादों को महाबलेश्वर से जुड़े खास अनुभव के रूप में याद रखते हैं। दशकों की मेहनत, अनुशासन और गुणवत्ता पर ध्यान ने इस जगह को टूरिस्टों के बीच पहली पसंद बना दिया है।

करीब 58 वर्षों की अनवरत मेहनत के बाद एक साधारण से मक्का–स्ट्रॉबेरी स्टॉल का इतने प्रसिद्ध रेस्त्रां में बदल जाना, अपने आप में प्रेरणादायक गाथा है। गहलोत ने कहा कि श्रीमती कुल्शुम मुलानी जैसी कर्मठ और संघर्षशील महिलाएं ही समाज के लिए असली प्रेरणास्रोत हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि लगातार मेहनत, ईमानदारी और हिम्मत के साथ कोई भी छोटा प्रयास बड़ी कामयाबी में बदला जा सकता है।

Share This Article