जयपुर। राजधानी जयपुर में नगर निगम की कार्यप्रणाली और शहर की मूलभूत समस्याओं को लेकर सोमवार को कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। जलभराव, टूटी सड़कों, गड्ढों और अन्य समस्याओं के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम मुख्यालय का घेराव किया। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन चलाना पड़ा, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने के बजाय पानी में ही नहाते हुए नारेबाजी करते रहे।
यह प्रदर्शन टोंक रोड स्थित नेहरू प्लेस से शुरू हुआ, जहां से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही बैरिकेडिंग कर रखी थी। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे मौके पर धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बन गई।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने दोनों ओर से वाटर कैनन चलाया, लेकिन इसका असर उल्टा देखने को मिला। कार्यकर्ता पीछे हटने के बजाय वहीं खड़े होकर पानी में नहाते रहे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी। करीब एक घंटे तक चले इस विरोध के दौरान कार्यकर्ता नगर निगम मुख्यालय के बाहर डटे रहे।
प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास सहित कई कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। खाचरियावास ने कहा कि पुलिस बल और बैरिकेडिंग से जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पृथ्वीराज नगर में एक भी मकान तोड़ा गया तो मुख्यमंत्री को सिविल लाइंस से बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा।
इस विरोध प्रदर्शन का असर शहर के ट्रैफिक पर भी पड़ा। टोंक रोड पर लंबा जाम लग गया, जिसके चलते पुलिस को यातायात डायवर्ट करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए, जिससे इसे आगामी नगर निगम चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस ने ‘हिसाब मांगो रैली’ के जरिए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सड़क, सफाई, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण और कर वसूली जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। पार्टी का आरोप है कि शहर की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है, जबकि सरकार और नगर निगम इन समस्याओं के समाधान में विफल रहे हैं।
फिलहाल, इस प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि निकाय चुनाव से पहले राजधानी में सियासी हलचल और तेज होने वाली है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों को लेकर राजनीति और गर्माने की संभावना जताई जा रही है।