JPSC-JSSC विवाद फिर गरमाया: हाईकोर्ट के फैसले से नाराज छात्रों का बड़ा ऐलान, 24 जिलों में हेमंत सोरेन का पुतला फूंकेंगे

News Desk

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद छात्रों में नाराजगी बढ़ गई है। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने शुक्रवार को राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंकने का ऐलान किया है। छात्रों का आरोप है कि सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के दौरान उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन अब अदालत में सरकार का रुख सामने आने के बाद उन्हें अपना भरोसा टूटता नजर आ रहा है।

पूरा मामला झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। छात्र लंबे समय से JPSC और JSSC की परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और प्रभावित परीक्षाओं को लेकर स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों ने करीब 26 दिनों तक आंदोलन किया था। लगातार प्रदर्शन के बाद सरकार की ओर से कई परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई का ऐलान किया गया था, जिसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया था।

छात्रों के आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से 22 परीक्षाएं रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया रोकने और 17 परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ी की जांच की बात सामने आई थी। छात्रों को उम्मीद थी कि सरकार भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आगे भी ठोस कार्रवाई करेगी। लेकिन अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद छात्र एक बार फिर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।

दरअसल, 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के उस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी, जिसमें 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा से हुई नियुक्तियों से जुड़ी कार्रवाई भी शामिल थी। कोर्ट ने राज्य सरकार और JPSC से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। ऐसे में यह अंतिम न्यायिक फैसला नहीं है, लेकिन छात्रों का कहना है कि अदालत में सरकार की ओर से रखे गए पक्ष से उनकी आशंकाएं बढ़ गई हैं।

छात्रों का सवाल है कि अगर सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच के आधार पर कार्रवाई का फैसला लिया था तो अदालत में उस फैसले का मजबूती से बचाव क्यों नहीं किया गया। इसी मुद्दे को लेकर JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने आंदोलन को फिर तेज करने का फैसला किया है। छात्रों का कहना है कि सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के लिए जो भरोसा दिया था, अब उसी भरोसे पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

यह आंदोलन पिछले कई दिनों से झारखंड की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इससे पहले छात्र नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग तक उठाई थी और सरकार के खिलाफ अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन और पुतला दहन का ऐलान किया था। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच और प्रभावित परीक्षाओं पर कार्रवाई के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शामिल है।

वहीं, सरकार की ओर से छात्रों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश भी की गई है। इससे पहले सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच वार्ता के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन छात्रों की सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। इसी वजह से आंदोलन पूरी तरह खत्म होने के बजाय अलग-अलग चरणों में जारी रहा।

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