कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पांच बार विधायक रह चुके आशीष बनर्जी का शव पार्टी कार्यालय के एक कमरे में मिला। घटना के बाद पुलिस ने मौके से एक कथित अंतिम नोट भी बरामद किया है, जिसमें उन्होंने खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किए जाने की बात कही है। पुलिस अब मौत की परिस्थितियों और नोट से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
आशीष बनर्जी के छोटे भाई प्रशांत बनर्जी ने बताया कि घटना से एक रात पहले तक परिवार को किसी तरह की परेशानी का अंदाजा नहीं था। उनके मुताबिक, शनिवार रात आशीष ने परिवार के साथ खाना खाया था और उस दौरान उनका व्यवहार बिल्कुल सामान्य था। प्रशांत ने कहा कि आशीष रोज सुबह टहलने के बाद कुछ समय पार्टी कार्यालय में बिताते थे और रविवार को भी उनकी दिनचर्या सामान्य रही। परिवार के लिए अचानक हुई इस घटना को समझ पाना मुश्किल है।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम TMC कार्यालय पहुंची। पुलिस अधीक्षक विदित राज भुंडेश के मुताबिक, जिस कमरे में आशीष बनर्जी मिले, उसके दोनों दरवाजे अंदर से बंद थे। पुलिस ने एक दरवाजा खोलकर अंदर प्रवेश किया और इसके बाद कमरे से कथित अंतिम नोट बरामद हुआ। पुलिस ने घटनास्थल से मिले दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है।
पुलिस के अनुसार, कथित नोट आशीष बनर्जी के लेटरहेड पर लिखा हुआ है। इसमें उन्होंने अपनी छवि खराब करने की कोशिश किए जाने का जिक्र किया और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों से इनकार किया। नोट में कथित तौर पर उन्होंने तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी TRDA की टेंडर प्रक्रिया से खुद को अलग बताया है। उन्होंने टेंडर, चेक जारी करने, नक्शा स्वीकृत करने और NOC जैसे मामलों में भी अपनी भूमिका होने से इनकार किया है।
कथित नोट में आशीष बनर्जी ने यह भी कहा है कि उन्होंने किसी काम के बदले पैसे नहीं लिए। साथ ही, राजनीति में आने को लेकर अफसोस जताने और पार्टी के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर असहज रहने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पुलिस अभी इस नोट की प्रामाणिकता और उसमें लिखी बातों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। मौत के कारण और नोट के बीच किसी संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
आशीष बनर्जी की मौत ऐसे समय हुई है जब TRDA की कार्यप्रणाली को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद चल रहा था। बीजेपी ने हाल में प्राधिकरण से जुड़े कामकाज में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे और आशीष बनर्जी की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। दूसरी ओर, कथित अंतिम नोट में उन्होंने इन आरोपों से दूरी बनाई है। इसी वजह से उनकी मौत ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
आशीष बनर्जी लंबे समय तक बंगाल की राजनीति में सक्रिय रहे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती थी। पांच बार विधायक रहने के साथ उन्होंने विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली। उनके अचानक निधन की खबर से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच शोक का माहौल है।
फिलहाल पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, कथित अंतिम नोट और अन्य परिस्थितियों को जोड़कर मामले की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम और जांच से सामने आने वाली जानकारी के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ होगी।