नई दिल्ली। वंदे मातरम् को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। बीजेपी सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वंदे मातरम् से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस के 1937 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने उस समय तुष्टिकरण की राजनीति के चलते राष्ट्रगीत के स्वरूप को लेकर समझौता किया था।
संबित पात्रा ने बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वंदे मातरम् देश की स्वतंत्रता और राष्ट्रभावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में वंदे मातरम् और स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों के सम्मान को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया है। पात्रा ने कहा कि पार्टी देशभर में वंदे मातरम् के सम्मान और इसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर अभियान चलाएगी।
विवाद की शुरुआत कांग्रेस कार्यसमिति के 19 अगस्त को लिए गए उस फैसले से हुई, जिसमें पार्टी ने 1937 के अपने पुराने प्रस्ताव पर कायम रहने का फैसला किया। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि पार्टी का रुख स्पष्ट है और वह 1937 में लिए गए फैसले का पालन करेगी।
बीजेपी इसी फैसले को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमलावर है। संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि 1937 में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने वंदे मातरम् के केवल शुरुआती हिस्से को स्वीकार करने का फैसला किया था। उन्होंने इस फैसले को बाद की विभाजनकारी राजनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि उस दौर में तुष्टिकरण की राजनीति के बीज बोए गए थे। पात्रा ने जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना के बीच हुए पत्राचार का भी हवाला दिया। हालांकि, कांग्रेस इस पूरे विवाद को बीजेपी की ओर से इतिहास और राष्ट्रवाद के राजनीतिक इस्तेमाल के रूप में देखती है।
संबित पात्रा ने 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के दौरान सोनिया गांधी ने दो अंतरों के बाद इसे रोकने का इशारा किया था। कांग्रेस की ओर से इस आरोप को खारिज किया गया और सफाई दी गई कि सोनिया गांधी वंदे मातरम् रोकने का इशारा नहीं कर रही थीं, बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को कह रही थीं।
पात्रा ने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने के फैसले पर क्यों कायम है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यालय में लिया गया कोई फैसला संसद और देश से ऊपर नहीं हो सकता। पात्रा ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों समेत हर संस्था संविधान से बंधी है और कोई भी संगठन खुद को संविधान से बड़ा नहीं मान सकता।
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पहले ही बीजेपी के आरोपों का जवाब दे चुके हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस वही संस्करण गाती रही है जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल समेत कई प्रमुख नेताओं ने स्वीकार किया था। कांग्रेस का तर्क है कि 1937 में पार्टी ने धार्मिक आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए पहले दो अंतरों को अपनाने का फैसला किया था और अब उसी ऐतिहासिक निर्णय का पालन किया जा रहा है।
वंदे मातरम् को लेकर यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है जब केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रगीत को लेकर आधिकारिक प्रोटोकॉल में बदलाव किए हैं। 2026 में पारित कानून के बाद वंदे मातरम् को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनी संरक्षण का दायरा भी बढ़ाया गया है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं।