सरकारी स्कूल के निरीक्षण पर घमासान, मदन दिलावर का रांका को जवाब; CJP ने फिर खोला मोर्चा

News Desk

जयपुर। जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन गया है। स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम के साथ हुए विवाद और कथित मारपीट के बाद संगठन ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। अब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश को अनुचित बताया, जबकि CJP नेता आशुतोष रांका ने मंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने लाने का अभियान जारी रखने की बात कही है।

पूरा विवाद 21 अगस्त को उस समय शुरू हुआ, जब आशुतोष रांका के नेतृत्व में CJP की टीम रामपुरा-कंवरपुरा के सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंची। टीम का दावा था कि स्कूल की स्थिति बेहद खराब है और विद्यार्थियों को स्कूल भवन के बजाय करीब 50 मीटर दूर एक बाड़े में टीनशेड के नीचे पढ़ाया जा रहा है। टीम के पहुंचने के बाद कुछ स्थानीय लोगों ने स्कूल परिसर में प्रवेश का विरोध किया और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया।

CJP का आरोप है कि इस दौरान उसके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई, पथराव हुआ और वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए। संगठन ने यह भी दावा किया कि एक महिला कार्यकर्ता के साथ मारपीट हुई और कुछ सदस्यों को चोटें आईं। दूसरी ओर, स्थानीय ग्रामीणों ने भी CJP टीम पर अभद्रता और विवाद खड़ा करने के आरोप लगाए हैं। दोनों पक्षों की ओर से पुलिस में शिकायत दिए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल घटना के पूरे तथ्य पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

विवाद बढ़ने के बाद CJP ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। संगठन की ओर से कथित हमले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी, स्कूल की मरम्मत शुरू कराने और सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर जारी नए दिशा-निर्देशों पर पुनर्विचार की मांग की गई। इसके साथ ही 48 घंटे में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को प्रदेश स्तर पर ले जाने की चेतावनी दी गई।

इसी बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति को स्कूल में जाना है तो संस्था प्रधान से अनुमति लेकर ही प्रवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन और निजता सुनिश्चित करना है। स्कूल परिसर में बाहरी लोगों की अनियंत्रित आवाजाही से पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो सकता है।

दिलावर ने यह भी कहा कि राज्य सरकार सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए काम कर रही है। उन्होंने पिछले दो बजटों में स्कूलों के विकास और आधारभूत सुविधाओं के लिए किए गए प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्कूलों की कमियां सामने आने पर उनका समाधान किया जाना चाहिए, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था का पालन भी जरूरी है।

मंत्री के बयान पर आशुतोष रांका ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि स्कूल की खराब हालत पर चर्चा करने के बजाय विवाद का केंद्र निरीक्षण क्यों बनाया जा रहा है। रांका ने आरोप लगाया कि घटना के दौरान CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और इसमें भाजपा से जुड़े लोगों की भूमिका रही। उन्होंने कहा कि उनकी टीम सरकारी स्कूलों की स्थिति को सामने लाने से पीछे नहीं हटेगी और अभियान जारी रहेगा।

रांका ने यह भी कहा कि अगर सरकार को लगता है कि स्कूलों में सुधार की जरूरत नहीं है, तो वह अपनी व्यवस्था और सुविधाओं को सार्वजनिक करे। उनके मुताबिक, स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखने से किसी को रोकना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने मंत्री के बयान को अपने अभियान के लिए चुनौती के तौर पर लिया और कहा कि अब सरकारी स्कूलों की स्थिति को और व्यापक स्तर पर सामने लाया जाएगा।

वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित स्कूल भवन की मरम्मत के लिए करीब 12.50 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं और स्थानीय स्तर पर मरम्मत का काम कराने की तैयारी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाहर से आए लोगों के स्कूल में प्रवेश को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि विवाद को राजनीतिक रूप देने के बजाय स्कूल की मरम्मत और बच्चों की सुविधाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

मामले पर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा का स्थान है और वहां राजनीतिक गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। बैरवा ने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं है और पुलिस जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों में विवाद और राजनीतिक गतिविधियों का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।

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