जयपुर। राजस्थान में निकाय चुनाव की सरगर्मियों के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या राजस्थान में लोकतांत्रिक व्यवस्था इसी तरह चलेगी। साथ ही अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता हमेशा एक जैसी नहीं रहती और समय बदलने पर हर फैसले का हिसाब देना पड़ सकता है।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले अधिकारियों के जरिए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि जिलों में कलेक्टर और एसडीएम स्तर के अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और भाजपा के संभावित उम्मीदवारों से जुड़े फॉर्म तथा अन्य जानकारियां जुटाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। हालांकि, ये आरोप डोटासरा की ओर से लगाए गए हैं और इन पर सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कर्मचारियों के परिवारों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव निष्पक्ष तरीके से होने चाहिए और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के पक्ष में नहीं किया जाना चाहिए।
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रशासनिक अधिकारियों पर इस तरह का दबाव क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग सरकारी तंत्र का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं।
अपने बयान में डोटासरा ने अधिकारियों को भी सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी भी राजनीतिक दबाव में आकर ऐसा काम न करें जिससे बाद में उन्हें जवाब देना पड़े। उनका कहना था कि सरकारें आती-जाती रहती हैं और सत्ता स्थायी नहीं होती। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि सत्ता बदलने के साथ कुर्सियां भी बदलती हैं और उस समय पुराने फैसलों का हिसाब भी लिया जा सकता है।
डोटासरा का यह बयान ऐसे समय आया है जब राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। वार्ड स्तर पर उम्मीदवारों के चयन से लेकर स्थानीय समीकरणों को साधने तक राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। टिकट के दावेदारों की संख्या अधिक होने के कारण दोनों प्रमुख दलों के सामने सही उम्मीदवार चुनने के साथ-साथ संभावित असंतोष को संभालने की चुनौती भी है।
कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों के तहत स्थानीय स्तर पर फीडबैक जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी की कोशिश है कि प्रत्येक क्षेत्र में मजबूत दावेदार की पहचान की जाए और स्थानीय कार्यकर्ताओं तथा नेताओं की राय के आधार पर उम्मीदवार तय किए जाएं। दूसरी ओर भाजपा भी वार्डवार संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रही है।
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस जहां प्रशासनिक मशीनरी की निष्पक्षता को मुद्दा बना रही है, वहीं भाजपा की चुनावी रणनीति पर भी उसकी नजर है। डोटासरा के ताजा बयान से साफ है कि कांग्रेस आने वाले चुनाव में सरकारी तंत्र की भूमिका को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
निकाय चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अब राजनीतिक दलों के उम्मीदवार जल्द ही मैदान में नजर आएंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में टिकट वितरण, बगावत और स्थानीय समीकरणों के साथ-साथ प्रशासन की भूमिका भी चुनावी बहस का हिस्सा बन सकती है।