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निगम के पूर्व पार्षदों पर सरकारी दफ्तरों के दुरुपयोग का आरोप, जांच की मांग

जयपुर। नगर निगम के वार्ड पार्षदों के कार्यकाल समाप्त हो चुके हैं, फिर भी वे सरकारी कार्यालयों को खाली नहीं कर रहे हैं। इसकी शिकायत समाजसेवी रईस खान जालूपुरा ने स्वायत्त शासन विभाग के सचिव, निदेशक और नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पूर्व पार्षद सरकारी संसाधनों का […]

जयपुर। नगर निगम के वार्ड पार्षदों के कार्यकाल समाप्त हो चुके हैं, फिर भी वे सरकारी कार्यालयों को खाली नहीं कर रहे हैं। इसकी शिकायत समाजसेवी रईस खान जालूपुरा ने स्वायत्त शासन विभाग के सचिव, निदेशक और नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पूर्व पार्षद सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं, जो प्रशासनिक नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इससे न केवल सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

रईस खान ने पत्र में लिखा कि कार्यकाल खत्म होने के बाद भी पूर्व पार्षद वार्ड कार्यालयों का उपयोग कर रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि इन सुविधाओं का खर्च कौन उठा रहा है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की तत्काल जांच कराई जाए, पूर्व पार्षदों द्वारा कार्यालयों के उपयोग को रोका जाए और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

समाजसेवी ने कुछ वार्ड कार्यालयों पर विशेष ध्यान दिलाते हुए कहा कि ये रात भर खुले रहते हैं। आखिर उनमें इतना जरूरी कार्य होता है क्या? या वहां पार्टियां आयोजित की जा रही हैं? उन्होंने विभाग से सवाल किया कि इस मुद्दे को अब तक अपने अधिकार क्षेत्र में क्यों नहीं लिया गया।

स्थानीय निवासियों ने भी इसकी शिकायतें की हैं। एक निवासी ने कहा सरकारी संपत्ति का निजी उपयोग गलत है। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। स्वायत्त शासन विभाग ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह मामला राजस्थान के अन्य निगमों में भी प्रासंगिक हो सकता है, जहां कार्यकाल समाप्ति के बाद समान समस्याएं देखी गई हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग को सक्रिय होना होगा।

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