ब्रह्माकुमारीज संस्थान के मानसरोवर परिसर में आयोजित राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन 2026 में देशभर से जुटे पत्रकारों ने बदलते मीडिया परिदृश्य, पत्रकारिता की जिम्मेदारियों और सकारात्मक समाज के निर्माण में मीडिया की भूमिका पर विस्तार से मंथन किया। ‘श्रेष्ठ विश्व के निर्माण हेतु सशक्त मीडिया’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से 1,500 से अधिक मीडियाकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान भारत न्यूज मीडिया ग्रुप के CEO एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. सरफराज सैफी को सम्मानित किया गया। उन्होंने पत्रकारिता में विश्वसनीयता, तथ्य-जांच और सकारात्मक कंटेंट की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि मौजूदा दौर में मीडिया की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सरफराज सैफी ने सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कोई भी सूचना कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है और वायरल हो सकती है, लेकिन किसी खबर या पोस्ट का वायरल होना उसके सच होने की गारंटी नहीं है। ऐसे में पत्रकारों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे किसी भी सूचना को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि करें।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल सूचनाओं को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना नहीं है। पत्रकारिता की वास्तविक भूमिका खबर के पीछे मौजूद तथ्यों और सच्चाई को सामने लाने की है। उनके मुताबिक एक पत्रकार को यह समझना होगा कि उसकी रिपोर्ट का समाज और लोगों की सोच पर क्या असर पड़ सकता है। इसलिए खबर को सामने लाने की जल्दबाजी में तथ्य-जांच और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
सरफराज सैफी ने कहा कि मीडिया की असली ताकत उसकी आवाज की ऊंचाई, पहुंच या खबर के वायरल होने में नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता में है। उन्होंने कहा कि TRP, व्यूज और क्लिक की प्रतिस्पर्धा ने मीडिया के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी की हैं, लेकिन इन दबावों के बीच पत्रकारिता के मूल्यों को कमजोर नहीं होने दिया जा सकता। तेज पत्रकारिता आज की जरूरत है, लेकिन गति के साथ तथ्यों की सटीकता और खबर की विश्वसनीयता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने पत्रकारों से ऐसी पत्रकारिता की जरूरत बताई जो निर्भीक हो, लेकिन गैर-जिम्मेदार नहीं; प्रभावशाली हो, लेकिन सनसनीखेज नहीं। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाना पत्रकार का अधिकार और जिम्मेदारी है, लेकिन उसके साथ तथ्यों और संदर्भों को सही तरीके से सामने रखना भी जरूरी है। पत्रकारिता में सवाल पूछने की स्वतंत्रता के साथ तथ्यों के प्रति जवाबदेही बनी रहनी चाहिए।
सरफराज सैफी ने सकारात्मक पत्रकारिता की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया में अपराध, विवाद, राजनीतिक टकराव और नकारात्मक घटनाओं को स्वाभाविक रूप से जगह मिलती है, लेकिन इसके साथ उन लोगों, संस्थाओं और प्रयासों को भी सामने लाया जाना चाहिए जो समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक समाज को केवल समस्याओं की जानकारी देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जहां संभव हो वहां समाधान की दिशा भी दिखानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल कमियां और समस्याएं उजागर करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मीडिया अपनी पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल लोगों को जागरूक करने, सकारात्मक पहल को बढ़ावा देने और समाज में बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए भी कर सकता है। बेहतर समाज और श्रेष्ठ विश्व के निर्माण में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है और इसके लिए पत्रकारों को अपनी जिम्मेदारी के साथ-साथ अपने प्रभाव को भी समझना होगा।
राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन में पत्रकारिता के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उससे जुड़ी संभावनाओं तथा चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने AI के सकारात्मक उपयोग के साथ इसके संभावित खतरों और साइबर युद्ध जैसी उभरती चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने बदलती तकनीक के बीच मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के सामने पैदा हो रही नई परिस्थितियों पर भी बात रखी।
वहीं प्रो. संजय द्विवेदी ने संवाद और पत्रकारिता की सामाजिक भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाचार और मीडिया का उद्देश्य समाज में संवाद को मजबूत करना होना चाहिए। पत्रकारिता ऐसी होनी चाहिए जो लोगों को जोड़ने का काम करे और सामाजिक सरोकारों को सामने लाए। सम्मेलन में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारिता की मानवीय और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
ब्रह्माकुमारीज मीडिया एवं PR विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजयोगी बीके करुणा भाई समेत संस्था के अन्य पदाधिकारियों ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पत्रकारों, संपादकों, मीडिया विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान मीडिया की बदलती भूमिका, डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव, पत्रकारिता में नैतिकता और समाज के प्रति मीडिया की जिम्मेदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
ब्रह्माकुमारीज के आधिकारिक कार्यक्रम विवरण के अनुसार राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन का आयोजन 9 से 13 सितंबर 2026 तक आबूरोड स्थित मानसरोवर परिसर में किया जा रहा है। मीडिया विंग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 1,500 प्रतिभागियों के लिए विभिन्न सत्र और गतिविधियां निर्धारित की गई हैं। सम्मेलन का उद्देश्य पत्रकारों और मीडिया से जुड़े लोगों के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित करने के साथ समाज निर्माण में मीडिया की भूमिका पर चर्चा करना है।
सम्मेलन के दौरान डॉ. सरफराज सैफी ने दो पुस्तकों का विमोचन भी किया। इसके अलावा उन्होंने ब्रह्माकुमारीज संस्था से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की और पत्रकारिता, मीडिया के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों तथा समाज में सकारात्मक बदलाव जैसे विषयों पर चर्चा की। इस दौरान मीडिया विंग से जुड़े बीके करुणा भाई ने भी सरफराज सैफी के मीडिया क्षेत्र में योगदान की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
सरफराज सैफी ने सम्मेलन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि आज के दौर में केवल बाहरी पहचान या ब्रांडिंग के सहारे लंबे समय तक विश्वसनीयता कायम नहीं रखी जा सकती। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को अपने कंटेंट, सोच और आचरण के जरिए अपनी विश्वसनीय पहचान बनानी होगी। उन्होंने कहा कि किसी पत्रकार की वास्तविक पहचान उसके काम और उसके द्वारा प्रस्तुत की गई खबर की गुणवत्ता से बनती है।
उन्होंने ब्रह्माकुमारीज संस्था की ओर से पत्रकारों के लिए इस तरह के आयोजन किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के लिए भीतरी शांति और सकारात्मक सोच महत्वपूर्ण है, क्योंकि पत्रकार जिस मानसिकता और दृष्टिकोण के साथ काम करता है, उसका प्रभाव उसकी पत्रकारिता में भी दिखाई देता है। उनके मुताबिक सकारात्मक सोच का मतलब कठिन सवालों से बचना नहीं, बल्कि तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ उन सवालों को समाज के सामने रखना है।
बदलते डिजिटल दौर में जहां सूचना की गति लगातार बढ़ रही है, वहीं गलत सूचना और भ्रामक कंटेंट की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे समय में पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखना ही मीडिया के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है।