Pali : राजस्थान के पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन में निकाय चुनाव का नतीजा आने के अगले ही दिन एक निर्दलीय पार्षद की अचानक मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। नगर पालिका के वार्ड-7 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज करने वाले अबरार खान मेव (58) का मंगलवार सुबह निधन हो गया। सोमवार को चुनाव जीतने के बाद जहां उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा था, वहीं अगले दिन सुबह अचानक उनकी मौत की खबर से माहौल गमगीन हो गया।
मंगलवार सुबह करीब 8 बजे चाय पीते समय अबरार खान के सीने में तेज दर्द हुआ। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तत्काल पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। अस्पताल में करीब 9 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया है।
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अबरार खान के घर पर समर्थकों और परिचितों का पहुंचना जारी था। जीत की बधाइयों के बीच ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। उनकी मौत की खबर सामने आते ही मारवाड़ जंक्शन में शोक की लहर दौड़ गई।
पूर्व विधायक खुशवीर सिंह जोजावर भी अस्पताल पहुंचे। 14 सितंबर को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने अबरार खान को जीत की बधाई दी थी। चुनाव जीतने के महज एक दिन बाद हुई इस अप्रत्याशित घटना ने स्थानीय राजनीतिक हलकों को भी झकझोर दिया है।
अबरार खान मेव इस चुनाव में कांग्रेस से टिकट के दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने वार्ड-7 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। उन्होंने पार्टी के टिकट के बिना चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की और नगरपालिका में निर्दलीय पार्षद के रूप में पहुंचे।
स्थानीय स्तर पर अबरार खान लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे थे। वह मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में कोयला कारोबारी के रूप में भी जाने जाते थे। इसके अलावा वह मुस्लिम समाज के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और पहले वार्ड पंच भी रह चुके थे। स्थानीय राजनीति में उनकी सक्रियता के कारण उनकी जीत को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
अबरार खान की मौत का असर अब नगर पालिका के बोर्ड गठन के समीकरण पर भी पड़ सकता है। मारवाड़ जंक्शन नगर पालिका में कुल 25 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में BJP और कांग्रेस ने 11-11 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि तीन वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे थे। किसी भी दल को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला था, इसलिए बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो गया था।
ऐसे में वार्ड-7 से निर्दलीय जीते अबरार भी उस राजनीतिक समीकरण का हिस्सा थे, जिसमें दोनों प्रमुख दलों को बहुमत के लिए निर्दलीय पार्षदों की जरूरत पड़ सकती थी। हालांकि अब बोर्ड गठन किस तरह होगा, यह केवल मौजूदा सीटों के आंकड़े से तय नहीं किया जा सकता। वार्ड-7 की रिक्त सीट को लेकर आगे क्या चुनावी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और उसका बोर्ड गठन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह संबंधित चुनावी निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल BJP और कांग्रेस दोनों 11-11 सीटों के साथ बराबरी पर हैं।