Jaipur : राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच आरक्षण को लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। जिला परिषद, पंचायत समिति, सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए सितंबर में प्रस्तावित आरक्षण लॉटरी को टाल दिया गया है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 17 सितंबर तथा सरपंच और वार्ड पंचों के लिए 18 सितंबर को लॉटरी होनी थी, लेकिन अब इन तारीखों पर प्रक्रिया नहीं होगी। नई तारीख को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
आरक्षण लॉटरी टलने का असर सीधे तौर पर उन नेताओं और संभावित उम्मीदवारों की तैयारियों पर पड़ा है, जो पंचायत चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में कई दावेदार लंबे समय से यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि उनके क्षेत्र की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी। आरक्षण की स्थिति सामने आने के बाद ही कई उम्मीदवार अपनी दावेदारी को अंतिम रूप दे सकेंगे। ऐसे में लॉटरी टलने से चुनावी तैयारियों का अगला चरण भी फिलहाल अटक गया है।
दरअसल, पंचायत चुनाव में आरक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यही तय करता है कि किस पंचायत समिति, जिला परिषद क्षेत्र, ग्राम पंचायत या वार्ड से कौन चुनाव लड़ सकता है। सीट सामान्य रहेगी या महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अथवा अन्य आरक्षित वर्ग के लिए जाएगी, इसका सीधा असर संभावित उम्मीदवारों के चुनावी समीकरण पर पड़ता है। इसी वजह से गांवों में कई दावेदार आरक्षण सूची का इंतजार कर रहे हैं और उसके बाद ही अपने राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।
आरक्षण लॉटरी टालने के पीछे फिलहाल निकाय चुनाव की प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यस्तता को प्रमुख वजह बताया गया है। पहले शहरी निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पदों का निर्वाचन कराने के बाद पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया आगे बढ़ाने का सुझाव दिया गया था। इसी क्रम में पहले से तय लॉटरी कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।
इस बदलाव के बाद अब पंचायत चुनाव की पूरी समय-सारणी पर भी इसका असर पड़ सकता है। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनावी क्षेत्रों की तस्वीर स्पष्ट होगी और उसके आधार पर उम्मीदवार अपनी तैयारी तेज कर सकेंगे। हालांकि, चुनाव की अंतिम तारीखों और अन्य चरणों को लेकर अभी आगे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
इधर आरक्षण लॉटरी टलते ही कांग्रेस ने सरकार को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने BJP सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार पंचायत चुनाव कराने से बचने की कोशिश कर रही है। डोटासरा का दावा है कि हालिया निकाय चुनाव के नतीजों के बाद BJP पंचायत चुनाव को लेकर दबाव में है और इसी वजह से चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में देरी की जा रही है।
डोटासरा ने BJP के ‘एक राज्य, एक चुनाव’ के नारे को भी निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार वास्तव में एक साथ चुनाव कराने की नीति पर आगे बढ़ना चाहती है तो पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने इसे सरकार की चुनावी रणनीति से जोड़ते हुए सवाल किया कि BJP आखिर चुनाव से कब तक भागेगी।
कांग्रेस के इस हमले का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि पंचायत चुनाव राजस्थान की ग्रामीण राजनीति के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव से अलग यहां स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, जातीय समीकरण, पंचायत स्तर के संगठन और गांवों में राजनीतिक नेटवर्क बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू होते ही दोनों प्रमुख दलों के स्थानीय नेताओं और संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ना स्वाभाविक है।
दूसरी ओर, लॉटरी की तारीख आगे बढ़ने से संभावित उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वे अभी अपने चुनावी क्षेत्र को लेकर अंतिम फैसला नहीं कर पा रहे हैं। कई दावेदार आरक्षण की स्थिति के आधार पर खुद चुनाव लड़ने या परिवार के किसी सदस्य को मैदान में उतारने की रणनीति बनाते हैं। ऐसे में आरक्षण सूची जारी होने तक स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह खुलकर सामने आने की संभावना कम है।
हालांकि, आरक्षण लॉटरी को राजनीतिक दबाव के कारण टाले जाने का आरोप फिलहाल डोटासरा का राजनीतिक दावा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार निकाय चुनाव की प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यस्तता को भी कार्यक्रम बदलने की वजह बताया गया है। ऐसे में सरकार और चुनाव आयोग की ओर से नई तारीख और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।