कुचेरा पालिका चुनाव से पहले बड़ा सियासी ट्विस्ट, पार्षद के अपहरण की शिकायत और फिर सामने आया वीडियो बोले- मैं सुरक्षित हूं

News Desk

Nagaur : नागौर की कुचेरा नगर पालिका में अध्यक्ष की कुर्सी अभी मिली भी नहीं है, लेकिन उसे लेकर सियासी गर्मी जरूर चरम पर पहुंच गई है। 25 वार्डों वाली इस नगरपालिका में बहुमत का आंकड़ा 13 है और कांग्रेस 12 सीटों के साथ इस आंकड़े से सिर्फ एक कदम दूर है। भाजपा के पास 8 पार्षद हैं, जबकि 5 निर्दलीय पार्षदों का गणित दोनों खेमों की बेचैनी बढ़ा रहा है। ऐसे में एक-एक पार्षद की मौजूदगी अब सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा और पुलिस तक पहुंच चुका मामला बन गई है। शुक्रवार को वार्ड 9 के कांग्रेस समर्थित पार्षद निम्बाराम के साले की ओर से उनके अपहरण की शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद मामला अचानक और गर्म हो गया। पुलिस होटल तक पहुंची, लेकिन पार्षद वहां नहीं मिले। कुछ ही देर बाद उनका वीडियो सामने आया और उन्होंने खुद को सुरक्षित बताते हुए अपहरण की शिकायत को गलत बताया।

मामले की शुरुआत उस शिकायत से हुई, जिसमें निम्बाराम के साले ने उनके अपहरण की बात कही। इसके बाद मूण्डवा डीएसपी धरम पूनिया के नेतृत्व में पुलिस टीम नागौर के बीकानेर रोड स्थित उस होटल पहुंची, जहां कांग्रेस समर्थित पार्षदों के ठहरने की जानकारी थी। पुलिस ने होटल की तलाशी ली, लेकिन निम्बाराम वहां नहीं मिले। पुलिस ने मौके पर मौजूद तेजपाल मिर्धा से भी पार्षद के बारे में पूछताछ की। यानी जिस पार्षद को तलाशने पुलिस पहुंची, वह कमरे में नहीं मिला और कुछ देर बाद कैमरे के सामने जरूर मिल गया—राजनीति में कभी-कभी लोकेशन भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की तरह सामने आती है।

इसके बाद निम्बाराम का वीडियो सामने आया, जिसमें वह दो अन्य पार्षदों के साथ नजर आए। उन्होंने खुद को सुरक्षित बताया और परिवार से चिंता नहीं करने की बात कही। बाद में अधिवक्ता महावीर विश्नोई के साथ जारी एक अन्य वीडियो में निम्बाराम ने अपने साले की ओर से दर्ज शिकायत को गलत बताया। उन्होंने कहा कि उनके और साले के बीच अनबन है और आरोप लगाया कि किसी दूसरे व्यक्ति के बहकावे में आकर उनके साले ने मामला दर्ज कराया है। ये आरोप निम्बाराम की ओर से लगाए गए हैं और मामले की पुलिस जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

कुचेरा में इस पूरे घटनाक्रम के पीछे असली राजनीतिक गणित समझना भी जरूरी है। 25 वार्डों में कांग्रेस के 12 पार्षद जीते हैं, भाजपा के 8 और 5 निर्दलीय पार्षद हैं। अध्यक्ष बनाने के लिए 13 वोट चाहिए। यानी कांग्रेस बहुमत से सिर्फ एक वोट दूर है, जबकि भाजपा को अपनी संख्या बढ़ाने के लिए निर्दलीयों के बड़े हिस्से का समर्थन जुटाना होगा। रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा खेमे ने चार निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया है, जिससे उसकी संख्या 12 तक पहुंचती है। ऐसे में एक वोट का महत्व इतना बढ़ गया है कि कुचेरा की राजनीति में फिलहाल पार्षद कम और कैलकुलेटर ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।

इससे पहले गुरुवार को शपथ ग्रहण के बाद कांग्रेस समर्थित पार्षदों के कुचेरा से नागौर जाने के दौरान झुंझाला गांव के पास कथित तौर पर उनकी गाड़ियों को रोकने और टक्कर मारने की कोशिश का आरोप भी सामने आया था। निवर्तमान पालिकाध्यक्ष तेजपाल मिर्धा ने आरोप लगाया कि पार्षदों के वाहनों के आगे पिकअप और कैंपर गाड़ियां लगाई गईं। उनका कहना था कि इसके बाद पार्षद मूण्डवा डीएसपी कार्यालय पहुंचे, जहां से पुलिस सुरक्षा में उन्हें नागौर लाया गया। इन आरोपों से पूर्व पालिकाध्यक्ष महेन्द्रपाल चौधरी ने इनकार किया और कहा कि घटना से उनका या भाजपा से जुड़े किसी व्यक्ति का कोई संबंध नहीं है। दोनों पक्षों के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

कुचेरा की मौजूदा तस्वीर पिछले चुनाव से बिल्कुल अलग है। पिछली बार कांग्रेस ने 25 में से 22 सीटें जीतकर लगभग एकतरफा स्थिति बनाई थी, जबकि इस बार मुकाबला इतना करीबी है कि अध्यक्ष पद का फैसला निर्दलीयों के रुख और अंतिम राजनीतिक समीकरण पर निर्भर करता दिखाई दे रहा है। इसी बीच भाजपा खेमे में पूर्व विधायक रिछपाल सिंह मिर्धा की अगुवाई में राजनीतिक जोड़तोड़ भी तेज हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक महेन्द्रपाल चौधरी और उनके पार्षद पुत्र अजयपाल को भाजपा खेमे में शामिल कराया गया है और निर्दलीयों के समर्थन का दावा भी किया जा रहा है।

अब अध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर को होना है। उससे पहले पार्षदों की सुरक्षा, उनके ठिकाने और समर्थन को लेकर दोनों खेमों की सक्रियता बढ़ना तय माना जा रहा है। कुचेरा में फिलहाल मामला इतना सीधा नहीं रह गया है कि सिर्फ यह पूछा जाए कि किसके पास कितने पार्षद हैं; सवाल यह भी है कि मतदान के दिन तक कौन किसके साथ खड़ा रहता है। अपहरण की शिकायत, पुलिस की होटल तलाशी, पार्षद का वीडियो और एक-एक वोट के लिए चल रही सियासी कवायद ने अध्यक्ष चुनाव को स्थानीय निकाय की सामान्य चुनावी प्रक्रिया से कहीं ज्यादा हाई-वोल्टेज बना दिया है। अब असली तस्वीर 21 सितंबर को सामने आएगी, जब वीडियो नहीं बल्कि वोट ही बताएंगे कि कुचेरा की कुर्सी किस खेमे के हिस्से आती है।

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