जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा-बीकानेर में थमेंगे बसों के पहिए, आज रात से निजी बसों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

News Desk

जयपुर। राजस्थान में बस से सफर करने वाले लाखों यात्रियों को आज रात से भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। परिवहन विभाग की कार्रवाई के विरोध में प्रदेशभर के निजी बस ऑपरेटरों ने 10 अगस्त की रात 11:59 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद राज्य में निजी बसों का संचालन पूरी तरह बंद हो जाएगा।

राज्य स्तरीय बैठक में लिए गए इस निर्णय के तहत स्लीपर, स्टेज कैरिज, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज और लोक परिवहन से जुड़ी सभी निजी बसें हड़ताल में शामिल रहेंगी। बस ऑपरेटरों का दावा है कि प्रदेशभर में करीब 35 हजार बसों के पहिए थम जाएंगे, जिससे रोजाना 10 लाख से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होगी। इसके साथ ही प्रतिदिन लगभग 30 से 35 करोड़ रुपए का कारोबार भी प्रभावित होने की आशंका है।

इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और बीकानेर जैसे बड़े शहरों पर पड़ेगा, जहां से अंतरजिला और अंतरराज्यीय बस सेवाएं संचालित होती हैं। इसके अलावा दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए चलने वाली निजी बस सेवाएं भी पूरी तरह बंद रहेंगी। ग्रामीण इलाकों में चलने वाली बसें भी नहीं चलेंगी, जिससे गांवों की कनेक्टिविटी पर बड़ा असर पड़ेगा।

बस यूनियनों ने सभी ऑपरेटरों को निर्देश दिए हैं कि हड़ताल शुरू होने के बाद कोई भी नया ऑनलाइन बुकिंग चार्ट जारी नहीं किया जाएगा और न ही किसी प्लेटफॉर्म से टिकट बुकिंग स्वीकार की जाएगी। जिन यात्रियों ने पहले से टिकट बुक करा रखी है, उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बस ऑपरेटरों का आरोप है कि परिवहन विभाग की ओर से की जा रही लगातार जांच और चालानी कार्रवाई मनमानी और अन्यायपूर्ण है। उनका कहना है कि करीब 2500 बसों को सीज किया गया है और बिना वजह चालान काटे जा रहे हैं, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े हजारों चालकों, परिचालकों और कर्मचारियों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

ऑपरेटर संगठनों का कहना है कि पहले भी दो बार आंदोलन किए गए, लेकिन सरकार के आश्वासन के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इस बार सभी संगठन एकजुट होकर हड़ताल कर रहे हैं और बिना लिखित आदेश के आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक सीज बसों को छोड़ा नहीं जाता और कार्रवाई पर रोक नहीं लगती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

यह भी उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 में भी निजी बस मालिकों ने हड़ताल की थी, जिससे करीब 35 हजार बसें बंद हो गई थीं और आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इस बार भी यदि हड़ताल लंबी चली तो यात्रियों के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और दैनिक आवागमन पर व्यापक असर पड़ सकता है।

फिलहाल, सभी की नजर राज्य सरकार और परिवहन विभाग की अगली रणनीति पर है। यदि समय रहते कोई समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।

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