कोटपूतली-बहरोड़ जिले में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सोमवार को बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष इन्द्राज गुर्जर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सफाई कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारी वाल्मीकि भवन, बड़ाबास से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां भारी पुलिस बल तैनात था। अंदर जाने को लेकर पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच झड़प जैसी स्थिति भी बनी, जिसके बाद प्रदर्शनकारी गेट पर ही धरने पर बैठ गए। बाद में इन्द्राज गुर्जर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर से मिला और सफाई कर्मचारियों की समस्याएं रखीं। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा ठेकेदारों द्वारा समय पर भुगतान न देना, पीएफ जमा न कराना, साप्ताहिक अवकाश न देना और कर्मचारियों का शोषण बताया गया।
गुर्जर ने कलेक्टर अपर्णा गुप्ता को बताया कि जिले की नगरपालिकाओं में काम करने वाले सफाई कर्मियों को महीनों से पूरा वेतन नहीं मिला है, जबकि कई जगहों पर भुगतान लगातार रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार मजदूरों को तय मानकों से कम वेतन दे रहे हैं, जिससे कर्मचारियों के परिवारों का जीवन-यापन मुश्किल हो गया है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले करीब एक सप्ताह से लगातार धरना दे रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा। इस वजह से शहरों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। नालियों से निकाला गया मलबा भी कई स्थानों पर जस का तस पड़ा हुआ है, जिससे बदबू और गंदगी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कस्बों और शहरों में नियमित सफाई नहीं होने से आम जनता बुरी तरह परेशान है। कई इलाकों में नाले-कूड़े से भर गए हैं और आने वाले गर्मी के दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। उन्होंने साफ कहा कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ेंगे। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कलेक्टर से मांग की कि सफाई व्यवस्था को तुरंत सुचारु किया जाए और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनका पूरा हक मिलना चाहिए और शोषण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आंदोलनकारियों की ओर से यह भी कहा गया कि पीएफ, वेतन और अवकाश जैसे बुनियादी अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो सीधा श्रमिकों के साथ अन्याय है।
कलेक्ट्रेट पर हुए इस घेराव के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। संगठन महामंत्री वी.के. नेवल ने बताया कि प्रदर्शन में रामनिवास यादव, जिलाध्यक्ष हनुमान सैनी, मुनानुदीन कुरैशी, रमेश गुप्ता, जगमाल सिंह यादव, तारा पूतली, प्रकाश सैनी, सतीश निमोरिया, अनिल वाल्मीकि, प्रदीप गुर्जर, वीरेन्द्र कसाना, बबलू वाल्मीकि, ललूराम वाल्मीकि, सुरेन्द्र वाल्मीकि सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और सफाई कर्मचारी शामिल हुए। यह पूरा आंदोलन सफाई कर्मचारियों के समर्थन और जिले की बिगड़ती सफाई व्यवस्था के खिलाफ जनआक्रोश के रूप में सामने आया।
आखिरकार जिला कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद आश्वासन दिया कि आगामी दस दिनों के भीतर ठेकेदारों से संबंधित सभी मांगों के निस्तारण की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने साफ संकेत दिया कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो वे दोबारा सड़कों पर उतरेंगे। यह घटनाक्रम बताता है कि जिले की सफाई व्यवस्था केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि श्रमिक अधिकारों और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है।
