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गहलोत का पीएम मोदी पर तीखा प्रहार, महिला आरक्षण कांग्रेस का विजन, परिसीमन पर सवाल

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। गहलोत ने कांग्रेस को महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा समर्थक बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस का ही विजन है और पिछले 25-30 वर्षों में लाखों […]

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। गहलोत ने कांग्रेस को महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा समर्थक बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस का ही विजन है और पिछले 25-30 वर्षों में लाखों महिलाओं को ग्रासरूट राजनीति में नेतृत्व का अवसर देने का पूरा श्रेय स्वर्गीय राजीव गांधी और कांग्रेस पार्टी को जाता है। 1992-93 में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित कर राजीव गांधी ने ग्रामीण भारत में महिला नेतृत्व की मजबूत नींव रखी, जिससे देशभर में 14 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि उभरीं।

गहलोत ने पीएम मोदी के वक्तव्य पर कटाक्ष किया कि मोदी जी को इस मौके पर राजीव गांधी को याद करना चाहिए था और यूपीए सरकार के प्रयासों का जिक्र करना चाहिए था, जिससे सदन में पक्ष-विपक्ष का अच्छा माहौल बनता। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम ने देशवासियों को भ्रमित करने की कोशिश की और जताया जैसे कांग्रेस सहित विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध कर रहा हो, जबकि सत्य यह है कि सभी दल इसके पक्षधर हैं। गहलोत ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की? उन्होंने कहा कि मोदी जी के पास फिर मौका था कि पक्ष-विपक्ष को साथ लेकर चलें, लेकिन उन्होंने इसे देशवासियों को मिसलीड करने के लिए इस्तेमाल किया।

महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन की आड़ बताते हुए गहलोत ने चेतावनी दी कि इसके खिलाफ कोई नहीं है, लेकिन इसकी आड़ में परिसीमन करने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण के राज्यों सहित सभी राज्यों और स्टेकहोल्डर्स से चर्चा हुई है? लोकसभा में प्रस्तावित परिसीमन से 543 सीटें 888 तक बढ़ेंगी, जो 2021 जनगणना पर आधारित होगी, जिससे उत्तर भारत को लाभ मिलेगा जबकि दक्षिणी राज्य अपनी सीटें खो सकते हैं। राजस्थान की 25 लोकसभा सीटें बढ़कर 35 हो सकती हैं, लेकिन ग्रामीण-शहरी असंतुलन और एससी-एसटी आरक्षण प्रभावित होगा। विपक्ष की मांग है कि जाति जनगणना पहले हो और एससी-एसटी-ओबीसी के लिए अलग कोटा सुनिश्चित हो।

गहलोत ने कांग्रेस की महिलाओं के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह कांग्रेस की ही सोच थी जिससे देश को पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मिलीं। मीरा कुमार लोकसभा स्पीकर बनीं और सोनिया गांधी ने यूपीए में महिला आरक्षण बिल राज्यसभा में पास कराया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष आज तक कोई महिला नहीं बन सकी, जबकि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को शीर्ष पद दिए। गहलोत का यह बयान लोकसभा में चल रही बहस के बीच आया जब प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अमित शाह ने भी इसी मुद्दे पर तीखे बयान दिए।

राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी परिसीमन पर सीएम भजनलाल शर्मा की चुप्पी पर सवाल उठाए और सर्वदलीय बैठक की मांग की। गहलोत का पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी जंग तेज हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि परिसीमन से 2029 चुनाव प्रभावित होंगे और विपक्ष इसे चुनावी हथियार बनाएगा। कांग्रेस ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण उनका मूल एजेंडा है लेकिन परिसीमन में पारदर्शिता जरूरी है। 

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