जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन मुद्दे पर राज्य सरकार की चुप्पी को प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ करार देते हुए तीखा प्रहार किया है। जूली ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील विषय है जो लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या, भौगोलिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन को सीधे प्रभावित करेगा, फिर भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से कोई स्पष्ट रुख नजर नहीं आ रहा। उन्होंने मांग की है कि तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए ताकि सभी राजनीतिक दल प्रदेश के पक्ष को मजबूती से रख सकें।
जूली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि परिसीमन कोई साधारण प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजस्थान के लोकतांत्रिक भविष्य को आकार देने वाला फैसला है। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटें 888 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिसमें जनगणना 2021 के आंकड़ों पर आधारित पुनर्गठन होगा। दक्षिणी राज्य जैसे तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जनसंख्या नियंत्रण के बावजूद सीटें खोने की चिंता जता रहे हैं, क्योंकि उत्तर भारत की अधिक आबादी वाले राज्यों को लाभ मिलेगा। राजस्थान में वर्तमान 25 लोकसभा सीटें 30-35 तक बढ़ सकती हैं, लेकिन ग्रामीण-शहरी असंतुलन और आरक्षण पैटर्न बदल जाएगा। जूली ने चेतावनी दी कि अनियोजित परिसीमन से अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा, जो प्रदेश की सामाजिक न्याय की भावना के विरुद्ध है।
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव समय पर नहीं करा पा रही, वह राष्ट्रीय परिसीमन जैसे जटिल मुद्दे पर केंद्र के सामने राजस्थान का पक्ष कैसे रखेगी। उन्होंने बताया कि पंचायती राज परिसीमन रिपोर्ट अभी मुख्यमंत्री को सौंपी जानी है, जिसमें 2,000-3,000 नई ग्राम पंचायतें प्रस्तावित हैं, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में देरी से लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं। जूली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों जैसे विकास किशनराव गवली मामले में स्पष्ट है कि परिसीमन चुनाव टालने का बहाना नहीं बन सकता। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भी इसी मुद्दे पर संवैधानिक संकट का जिक्र किया था, जो सियासी घमासान तेज कर रहा है।
जूली ने मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत कटाक्ष करते हुए कहा कि जनहित के गंभीर मुद्दों को छोड़कर वे केवल इवेंट मैनेजमेंट और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि शासन के लिए विजन जरूरी है, जो वर्तमान सरकार में नदारद है। क्या मुख्यमंत्री को प्रदेश के सभी दलों के विचार जानने की जरूरत नहीं? सर्वदलीय बैठक से तकनीकी, राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं पर चर्चा हो सकेगी, जहां राजस्थान के हक की रक्षा सुनिश्चित होगी। जूली ने जोर देकर कहा कि जनता के प्रतिनिधित्व से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह बयान लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर चल रही बहस के बीच आया है, जहां विपक्ष एससी-एसटी-ओबीसी कोटा की मांग कर रहा है। राजस्थान में भाजपा सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, जिससे सियासी तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस ने इसे प्रदेश हित के साथ खिलवाड़ बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिसीमन से राजस्थान को सीटों में वृद्धि मिलेगी लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों का नुकसान हो सकता है। जूली की मांग ने राज्य सरकार पर दबाव बना दिया है।

