Jaipur : राजस्थान निकाय चुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) कई शहरी निकायों में बढ़त बनाती नजर आ रही है। शुरुआती नतीजों के साथ ही बीजेपी के भीतर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक सक्रियता चर्चा में आ गई है। First India की रिपोर्ट में मुख्यमंत्री को पार्टी की चुनावी रणनीति के प्रमुख चेहरे के तौर पर पेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनावी तैयारियों के दौरान भजनलाल शर्मा ने प्रचार से लेकर संगठन के स्तर तक लगातार सक्रियता बनाए रखी और पार्टी नेताओं के साथ लगातार समन्वय किया।
First India के अनुसार, मुख्यमंत्री चुनावी तैयारियों के दौरान देर रात तक संगठन के नेताओं के साथ बैठकें करते रहे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई मौकों पर ये बैठकें रात 3:30 से 4 बजे तक चलीं। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंस, ऑडियो ब्रिज और फोन कॉल के जरिए भी मुख्यमंत्री पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क में रहे। चुनावी मैदान में संगठन की गतिविधियों और अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति को लेकर फीडबैक लेने पर भी उनका फोकस रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने चुनावी रणनीति तैयार करने के दौरान पार्टी की कोर टीम के प्रमुख नेताओं की सलाह को भी महत्व दिया। बीजेपी के भीतर अलग-अलग स्तर के नेताओं के बीच बेहतर तालमेल और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखने की कोशिश को भी इस पूरी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। पार्टी की ओर से इसे संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि शुरुआती चुनावी बढ़त को पूरी तरह किसी एक नेता की रणनीति का नतीजा मानना अंतिम परिणाम आने के बाद ही संभव होगा।
निकाय चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद भी लगातार मैदान में सक्रिय रहे। बीजेपी ने उन्हें प्रमुख प्रचार चेहरों में शामिल किया था और उन्होंने अलग-अलग शहरों में रोड शो और जनसभाओं के जरिए पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में भी मुख्यमंत्री की सक्रियता बनी रही। इसके साथ ही पार्टी संगठन ने बूथ स्तर पर मतदाताओं से संपर्क और चुनावी प्रबंधन को लेकर भी व्यापक तैयारियां की थीं।
निकाय चुनावों में मुख्यमंत्री की यह सक्रियता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में बीजेपी के संगठन और सरकार की स्वीकार्यता को परखने का यह बड़ा मौका है। विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं होते, लेकिन इनसे राजनीतिक दलों को जमीनी संगठन, स्थानीय मुद्दों और शहरी मतदाताओं के रुझान का अंदाजा जरूर मिलता है।
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में भी मतगणना जारी है। First India की शुरुआती रिपोर्ट में बीजेपी के कई प्रत्याशियों की जीत की जानकारी सामने आई है। इनमें वार्ड 54 से कमल किशोर, वार्ड 3 से भवानी शंकर शर्मा, वार्ड 62 से रामावतार शर्मा, वार्ड 24 से आनंद सिंह और वार्ड 53 से सतीश कुमार की जीत शामिल बताई गई है। हालांकि, जयपुर समेत प्रदेशभर में मतगणना अभी जारी रहने के कारण इन शुरुआती परिणामों के आधार पर पूरे चुनाव की अंतिम तस्वीर तय नहीं की जा सकती।
अन्य रिपोर्टों में भी शुरुआती रुझानों में बीजेपी को जयपुर सहित कई प्रमुख शहरी निकायों में बढ़त मिलने की जानकारी सामने आई है। अंतिम राजनीतिक तस्वीर सभी वार्डों की मतगणना पूरी होने और आधिकारिक परिणाम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके बाद ही यह आकलन किया जा सकेगा कि बीजेपी की शुरुआती बढ़त कितनी सीटों में जीत में बदली और किन क्षेत्रों में कांग्रेस, निर्दलीय या अन्य दलों ने मुकाबला किया।
राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणाम सोमवार को सामने आ रहे हैं। इन चुनावों के लिए मतदान दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को हुआ था, जबकि मतगणना 14 सितंबर को सुबह 8 बजे शुरू हुई। प्रदेश के अलग-अलग नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में वार्डवार मतगणना की जा रही है। बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के मैदान में होने के कारण कई जगहों पर अंतिम परिणाम आने में समय लग सकता है।
इन निकाय चुनावों को 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान की शहरी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी के लिए इन चुनावों में प्रदर्शन सरकार के करीब दो साल के कामकाज और संगठन की जमीनी सक्रियता के आकलन से भी जोड़ा जाएगा। वहीं कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव सत्ता पक्ष के खिलाफ स्थानीय स्तर पर माहौल और संगठन की पकड़ परखने का मौका है।
चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी और कांग्रेस के बीच कई मुद्दों पर सीधा राजनीतिक टकराव देखने को मिला था। कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने सरकार पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए थे। बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज किया और चुनाव को लेकर अपनी संगठनात्मक तैयारियों पर जोर दिया।
अब जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ रही है, दोनों प्रमुख दलों के प्रदर्शन की तस्वीर भी साफ होती जा रही है। बीजेपी की शुरुआती बढ़त अगर अंतिम नतीजों में मजबूत जीत में बदलती है तो इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश बीजेपी संगठन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं, अगर कई निकायों में कांग्रेस या निर्दलीय उम्मीदवार मजबूत प्रदर्शन करते हैं तो स्थानीय स्तर पर मुकाबले की तस्वीर अलग हो सकती है।
फिलहाल शुरुआती रुझानों ने बीजेपी के खेमे में उत्साह बढ़ाया है और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की चुनावी सक्रियता चर्चा के केंद्र में है। हालांकि, चुनावी जीत का अंतिम आकलन आधिकारिक और पूर्ण परिणाम आने के बाद ही किया जाना उचित होगा।