Wednesday, 13 May 2026
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गाय को “अम्मा” कहते है सिंधी मुस्लिम

पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में बसे सिंधी मुस्लिम समुदाय की एक परंपरा ने हमेशा लोगों का ध्यान खींचा है। यह समुदाय गाय को ‘अम्मा’ कहकर पुकारता है और उसे परिवार का अभिन्न अंग मानता है। बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, जोधपुर, फलोदी क्षेत्र सहित जोधपुर संभाग के अन्य जिलों में बसे ये समुदाय न केवल अपनी […]

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पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में बसे सिंधी मुस्लिम समुदाय की एक परंपरा ने हमेशा लोगों का ध्यान खींचा है। यह समुदाय गाय को ‘अम्मा’ कहकर पुकारता है और उसे परिवार का अभिन्न अंग मानता है। बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, जोधपुर, फलोदी क्षेत्र सहित जोधपुर संभाग के अन्य जिलों में बसे ये समुदाय न केवल अपनी सांस्कृतिक जड़ों को संजोए रखते हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव की मिसाल भी पेश करते हैं। पूर्व मंत्री अमीन खान और गफूर अहमद जैसे प्रमुख नेताओं ने इस परंपरा को सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया है। उन्होंने स्पष्ट बयान दिए कि सिंधी मुस्लिम गाय से गहरा प्रेम करते हैं।

सिंधी मुस्लिमों की सबसे चर्चित परंपरा है गाय को ‘अम्मा’ कहना। हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों में गाय का महत्व हमेशा रहा है, लेकिन सिंधी मुस्लिमों ने इसे एक अलग स्तर पर ले लिया। उनके लिए गाय दूध, घी और खेती के लिए बैल प्रदान करने वाली मां समान है। घरों में गाय को सम्मान दिया जाता है। बच्चे गाय को ‘अम्मा’ कहकर दुलारते हैं और उसे खिलाने का काम परिवार का हिस्सा बन जाता है। चाहे गाय खुद की हो, पड़ोसी की या जंगल में भटक रही हो, वे इसे चारा खिलाते, पानी पिलाते और बड़े प्यार से रखते हैं। ये लोग रेगिस्तान की कठोर धूप में भी गायों की सेवा करते हैं। यह परंपरा पुरानी कृषि संस्कृति से आई है, जहां पशुपालन जीवन का आधार था। बाड़मेर के एक बुजुर्ग सिंधी मुस्लिम बताया कि “गाय हमारे लिए अम्मा है। हम उसे कभी नुकसान नहीं पहुंचाते। यह भावना धार्मिक सीमाओं से परे है। इस्लामी शिक्षाओं में भी पशुओं के प्रति दया का आदेश है, और सिंधी समुदाय ने इसे गाय के संदर्भ में जीवंत कर दिया। जैसलमेर के रेगिस्तानी गांवों में गौशालाओं का संचालन सिंधी मुस्लिम करते दिखते हैं। यह परंपरा सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बनी हुई है, खासकर गौ-रक्षा विवादों के दौर में।

अमीन खान और गफूर अहमद के बयान

इस परंपरा को राजनीतिक पटल पर लाने का श्रेय पूर्व मंत्रियों अमीन खान और गफूर अहमद को जाता है। अमीन खान, जो राजस्थान सरकार में मंत्री रह चुके हैं उन्होंने विधानसभा में कहा था कि सिंधी मुस्लिम भाइयों का गाय से गहरा प्रेम है। वे गाय को अम्मा कहते हैं और उसकी सेवा करते हैं। यह बयान उस दौरान आया, जब गौ-रक्षा को लेकर तनाव चरम पर था। इसी तरह पूर्व विधायक अब्दुल हादी के पुत्र पूर्व राज्य मंत्री गफूर अहमद ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि हमारे सिंधी मुस्लिम समुदाय में गाय को मां का दर्जा प्राप्त है। कोई भेदभाव नहीं। इन बयानों ने न केवल समुदाय की छवि साफ की, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत किया। इन नेताओं के बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुए और राजस्थान की राजनीति में सकारात्मक चर्चा का विषय बने। वर्तमान में भी, जब भजनलाल शर्मा सरकार सत्ता में है, ये बयान प्रासंगिक बने हुए हैं।

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