निकाय-पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, 200 विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट पर बनेगी रणनीति; OBC आरक्षण पर सरकार से मांगा जवाब

News Desk

जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय और पंचायती राज चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस ने संगठन को चुनावी मोड में ला दिया है। पार्टी ने प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों से स्थानीय स्तर का फीडबैक जुटाया है। इसमें संगठन की मौजूदा स्थिति, सक्रिय और निष्क्रिय पदाधिकारी, संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की जानकारी शामिल है। कांग्रेस का कहना है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवारों और संगठन की रणनीति तय की जाएगी।

पार्टी अब 17 और 18 अगस्त को वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर इस फीडबैक पर चर्चा करेगी। इन बैठकों में विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों, सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों और प्रदेश कांग्रेस के जिला प्रभारियों को शामिल किया जाएगा। जमीनी रिपोर्ट के आधार पर यह तय करने की कोशिश होगी कि किन इलाकों में संगठन को मजबूत करने की जरूरत है और किन नेताओं को चुनावी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

कांग्रेस की चुनावी तैयारी के बीच OBC आरक्षण का मुद्दा भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। पार्टी नेताओं ने जिला परिषद और पंचायत समिति क्षेत्रों के आरक्षण से जुड़े आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जनसंख्या के आंकड़ों और आरक्षण के अनुपात में अंतर दिखाई दे रहा है और सरकार को इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

कांग्रेस के मुताबिक, प्रदेश की 41 जिला परिषदों के 1,403 निर्वाचन क्षेत्रों में 192 सीटें OBC के लिए आरक्षित की गई हैं। पार्टी का दावा है कि यह करीब 13.68 प्रतिशत बैठता है, जबकि 21 प्रतिशत के पुराने स्तर के आधार पर यह संख्या करीब 294 होनी चाहिए थी। इसी तरह 457 पंचायत समितियों के 8,245 निर्वाचन क्षेत्रों में 1,101 सीटों के OBC आरक्षण को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।

पार्टी नेताओं का कहना है कि कई क्षेत्रों में SC, ST और OBC को मिलाकर भी आरक्षण 50 प्रतिशत तक नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि आरक्षण तय करने के लिए इस्तेमाल किए गए सर्वे, जनसंख्या के आंकड़े और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि इससे यह साफ होगा कि आरक्षण का आधार क्या रखा गया और अलग-अलग वर्गों के लिए सीटें किस तरीके से तय की गईं।

कांग्रेस ने OBC से जुड़ी रिपोर्ट को विधानसभा में रखने और इस पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग भी की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव से पहले आरक्षण व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता जरूरी है और सभी दलों और जनप्रतिनिधियों को रिपोर्ट पर अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों को दूर नहीं किया गया तो वह इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाएगी।

इधर, निकाय चुनावों में टिकट वितरण को लेकर भी कांग्रेस ने तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी स्थानीय स्तर से मिले फीडबैक के आधार पर मजबूत दावेदारों की पहचान कर रही है और बागी उम्मीदवारों की संभावना को भी ध्यान में रखा जा रहा है। संगठन की कोशिश है कि टिकट घोषित होने के बाद असंतोष कम रहे और स्थानीय नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बना रहे।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अव्यवस्था के आरोप भी लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि स्थानीय स्तर पर लोगों में सरकार को लेकर नाराजगी है और यही मुद्दे निकाय व पंचायत चुनावों में कांग्रेस के लिए अहम बन सकते हैं। हालांकि, इन दावों के बीच कांग्रेस के सामने अपनी संगठनात्मक कमजोरियों और गुटबाजी को संभालना भी बड़ी चुनौती होगी।

अब 17 और 18 अगस्त की बैठकों पर सबकी नजर है। इन्हीं बैठकों में जमीनी फीडबैक की समीक्षा के बाद पार्टी आगे की चुनावी रणनीति तय करेगी। ऐसे में एक तरफ कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में जुटी है, वहीं OBC आरक्षण का मुद्दा चुनाव से पहले सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव को और तेज करता नजर आ रहा है।

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