कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कई मुद्दों पर मंथन, 800 शहरों में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का ऐलान

News Desk

नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति की बुधवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में करीब चार घंटे तक बैठक हुई। इसमें पेपर लीक और छात्र आंदोलन से लेकर अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, चीन की कथित घुसपैठ, ई-20 इथेनॉल, परिसीमन और जाति जनगणना जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद पार्टी ने साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में इन मुद्दों को संसद के साथ-साथ देशभर में जनता के बीच भी उठाया जाएगा। इसके तहत 800 शहरों में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित करने और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को जमीनी स्तर तक ले जाने का फैसला किया गया है।

बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। इसमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव प्रियंका गांधी और चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत कार्यसमिति के 88 सदस्य शामिल हुए। बैठक खत्म होने के बाद केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने पत्रकारों से बातचीत कर पार्टी के फैसलों की जानकारी दी।

बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक छात्रों का आंदोलन और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामले रहे। कांग्रेस ने दिल्ली में छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर भी चिंता जताई। पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों को अब केवल संसद तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसी के तहत देशभर के 800 शहरों में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला लिया गया है। इन कार्यक्रमों में राहुल गांधी भी कई जगह शामिल होंगे। साथ ही कांग्रेस ने अपने चारों मुख्यमंत्रियों से अगले एक महीने के भीतर अपने-अपने राज्यों में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर ठोस योजना तैयार करने को कहा है।

बैठक में अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। कांग्रेस ने तय किया कि इस मुद्दे को देशभर में उठाया जाएगा और गांव-गांव तक पार्टी कार्यकर्ताओं के माध्यम से इसे पहुंचाया जाएगा। पार्टी नेताओं ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी जनसभा के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण के मामले पर भी कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया। पार्टी नेताओं ने इसे बेहद आपत्तिजनक बताते हुए आरोप लगाया कि इस घटना में भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों की भूमिका रही। कांग्रेस कार्यसमिति ने इस मामले पर प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की है। पार्टी ने यह सवाल भी उठाया कि ऐसी घटना पर प्रधानमंत्री की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।

बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। जयराम रमेश ने चीन को लेकर आरोप लगाया कि लद्दाख के कुछ इलाकों में भारतीय नागरिकों की आवाजाही और सेना की गश्त को लेकर स्थिति पहले जैसी नहीं रही है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियों पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन और अमेरिका के साथ विदेश नीति को लेकर भी चिंता जताई और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की।

परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस ने अपनी स्थिति दोहराते हुए कहा कि अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की 543 सीटों की मौजूदा संख्या बरकरार रहनी चाहिए। पार्टी का प्रस्ताव है कि इन्हीं 543 सीटों पर एक-तिहाई महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए। कांग्रेस का तर्क है कि इससे महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का फैसला टाला नहीं जाएगा और राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व में भी बदलाव नहीं होगा।

संगठन को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। केसी वेणुगोपाल ने बताया कि कांग्रेस का ‘संगठन सृजन अभियान’ देशभर में चल रहा है और 31 अक्टूबर तक बूथ स्तर से लेकर राज्य स्तर तक संगठन को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी का जोर जमीनी ढांचे को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर है, ताकि आने वाले चुनावों में संगठन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

जाति जनगणना को लेकर भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। जयराम रमेश ने कहा कि जाति जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम नहीं होना पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार व्यापक और प्रभावी जाति जनगणना कराने को लेकर गंभीर नहीं है।

वहीं, वंदे मातरम को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर कांग्रेस ने अपने पुराने रुख का हवाला दिया। जयराम रमेश ने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस कार्यसमिति की स्थिति 1937 में ही स्पष्ट हो गई थी, जब इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर समेत कई प्रमुख नेता इस चर्चा से जुड़े थे।

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