राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, पहले दिन 21 मिनट में कार्यवाही स्थगित; तीन अहम बिलों पर टिकी नजर

News Desk

जयपुर। राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू हो गया, लेकिन पहले ही दिन सदन में हंगामे और विपक्ष के प्रदर्शन के बीच कार्यवाही ज्यादा देर नहीं चल सकी। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही सुबह 11:22 बजे शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा के बाहर भी कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी के विधायकों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया।

सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस ने शिक्षा विभाग के हालिया फैसलों और स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की अगुवाई में कांग्रेस विधायक पोद्दार मूक-बधिर स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे। विधानसभा के गेट पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। कुछ कांग्रेस विधायक बैरिकेड्स पर भी चढ़ गए। इसके बाद गोविंद सिंह डोटासरा, सचिन पायलट और टीकाराम जूली समेत कई नेता विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर तीखा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के करीब 3 हजार स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और कई जगह बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। डोटासरा ने शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर जवाब मांगा।

वहीं, भारत आदिवासी पार्टी के विधायकों ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग को लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। इस तरह सत्र की शुरुआत से ही अलग-अलग मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव की तस्वीर दिखाई दी। हालांकि सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

अब सबकी नजर उन विधेयकों पर है, जिन्हें मानसून सत्र में पेश किया जाना है। इनमें ‘द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल, 2026’ खास चर्चा में है। प्रस्तावित कानून के तहत 29 प्रजातियों के पेड़ों को प्रतिबंधित श्रेणी में रखने का प्रावधान है। इनमें बबूल और शीशम भी शामिल हैं, जिनका राजस्थान के फर्नीचर और हस्तशिल्प कारोबार में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। बिना अनुमति प्रतिबंधित पेड़ काटने पर एक लाख रुपए तक जुर्माने और एक साल तक सश्रम कारावास का प्रावधान प्रस्तावित है।

पेड़ों की प्रस्तावित सूची को लेकर हस्तशिल्प और फर्नीचर उद्योग में चिंता बढ़ गई है। राजस्थान हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स जॉइंट फोरम ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बबूल और शीशम को प्रतिबंधित सूची से बाहर रखने की मांग की है। फोरम के मुताबिक, इन दोनों लकड़ियों का इस्तेमाल फर्नीचर, सजावटी सामान और हस्तशिल्प उत्पादों में होता है, जिनका विदेशों में भी निर्यात किया जाता है। संगठन का दावा है कि यह कारोबार करीब 12 हजार करोड़ रुपए की सालाना विदेशी मुद्रा कमाता है और लगभग 7 लाख कारीगर इससे जुड़े हैं।

सत्र के दौरान ट्रीज बिल के अलावा यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और एक निजी विश्वविद्यालय से संबंधित विधेयक भी सदन में रखे जाने की संभावना है। जीएसटी संशोधन विधेयक को लेकर फिलहाल राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार है। ऐसे में आने वाले दिनों में कानून-व्यवस्था, शिक्षा, भर्ती, स्थानीय चुनाव और विकास योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।

विधानसभा सत्र शुरू होने से एक दिन पहले सत्ता और विपक्ष दोनों ने अपनी रणनीति तय कर ली थी। ऐसे में पहले ही दिन हुए प्रदर्शन से संकेत मिल गया है कि यह मानसून सत्र शांत रहने वाला नहीं है।

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