नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा विवाद अब संसद की दहलीज तक पहुंच गया है। पार्टी के 20 बागी सांसदों की लोकसभा सदस्यता पर उठे सवालों के बीच लोकसभा सचिवालय ने उन्हें नोटिस जारी किया है। सांसदों से अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं पर सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। यह कार्रवाई TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिकाओं के बाद हुई है।
लोकसभा की इस कार्रवाई के बाद TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों पर पार्टी छोड़ने और दूसरे राजनीतिक संगठन से जुड़ने के आरोप हैं, उन्हें अपने फैसले पर जवाब देना चाहिए। सिन्हा के बयान से साफ है कि TMC नेतृत्व इस मामले को गंभीरता से आगे बढ़ाने के मूड में है।
दरअसल, TMC ने अपने 20 सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि इन सांसदों ने TMC से अलग होकर नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का रुख किया है। TMC ने इसी आधार पर उनकी लोकसभा सदस्यता खत्म करने की मांग की है। हालांकि, बागी सांसदों का पक्ष और उनके जवाब के बाद मामले की कानूनी स्थिति आगे स्पष्ट होगी।
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी नोटिस में संबंधित सांसदों से अयोग्यता याचिकाओं पर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। अब सांसदों के जवाब के बाद मामले में आगे की प्रक्रिया तय होगी। इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि लगाए गए दल-बदल के आरोपों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अयोग्यता की कार्रवाई बनती है या नहीं।
यह विवाद पहले ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अभिषेक बनर्जी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि बागी सांसदों के खिलाफ दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में संबंधित सांसदों से जवाब मांगा है। ऐसे में अब यह विवाद एक साथ राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ रहा है।
अभिषेक बनर्जी की याचिका में लोकसभा अध्यक्ष और लोकसभा महासचिव को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिका का प्रमुख मुद्दा यह है कि दल-बदल से जुड़े मामलों में अयोग्यता की प्रक्रिया को अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए और इस पर उचित समयसीमा के भीतर निर्णय होना चाहिए।
20 सांसदों को नोटिस जारी होने के बाद TMC और बागी सांसदों के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है। पार्टी जहां इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं बागी सांसद अपने राजनीतिक रुख को लेकर अपना पक्ष रख सकते हैं। अब उनके जवाब से यह भी संकेत मिलेगा कि वे पार्टी से अलग होने के अपने फैसले को किस आधार पर उचित ठहराते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में शत्रुघ्न सिन्हा की प्रतिक्रिया भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। TMC सांसद के तौर पर उनका लोकसभा सचिवालय की कार्रवाई का समर्थन करना पार्टी नेतृत्व के रुख को मजबूती देता है। उन्होंने बागी सांसदों से अपने फैसले की जवाबदेही तय करने की बात कही है।
मामले का असर केवल TMC की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है। अगर दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो इसका असर संसद में पार्टी की संख्या और राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि लोकसभा सचिवालय की कार्रवाई पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
अब अगला अहम पड़ाव बागी सांसदों का जवाब होगा। सात दिन की समयसीमा में उनका पक्ष सामने आने के बाद लोकसभा स्तर पर आगे की कार्रवाई तय होगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही इस पूरे विवाद को एक अलग कानूनी आयाम दे रही है।