जयपुर । नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य की भाजपा सरकार को घेरते हुए दलित उत्पीड़न और प्रशासनिक विफलता पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। जूली ने कहा कि प्रदेश में दलित इंजीनियर श्री जगनलाल बैरवा को अभी तक न्याय नहीं मिला है। पीड़ित को इंसाफ दिलाने के बजाय भाजपा विधायक, जिला कलेक्टर और सीएमओ के बीच इस प्रकरण को फुटबॉल की तरह घुमाया जा रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर कब तक दलित समाज को न्याय के लिए तरसना पड़ेगा? जूली ने सरकार से सवाल किया है कि यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि बैरवा पर कोई दबाव न डाला जाए और जांच पूरी तरह से निष्पक्ष हो क्योंकि मामला सत्ताधारी दल के विधायक से जुड़ा हुआ है ?
सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
जूली ने कहा कि बताया जा रहा है कि एक हाईलेवल कमेटी इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह जांच कब पूरी होगी? सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब बगैर जांच के बैरवा को पुलिस के हवाले कर दिया गया था, तो अब इंजीनियर मीणा के मामले में इतनी देरी क्यों? क्या इस सिस्टम से एक दलित इंजीनियर को निष्पक्ष न्याय मिल पाएगा? यह मौजूदा सरकार के दलित विरोधी चेहरे को उजागर करता है।
चुनावी रण से भाग रही सरकार; घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने
नेता प्रतिपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि आज राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर न कराना भाजपा की हार के डर को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “भाजपा का हाल ऐसा है कि घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने।” प्रदेश में चुनाव न होने से लोकतान्त्रिक संस्थाएं ठप पड़ी हैं, विकास कार्य रुके हुए हैं, लेकिन सरकार अपनी विफलता पर पर्दा डालने के लिए बाहरी राज्यों के जश्न में डूबी है। जो सरकार अपने राज्य के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरा करने का साहस नहीं जुटा पा रही, वह किस मुँह से जश्न मना रही है ?
संविदा नहीं, स्थायी रोज़गार ही राजस्थान के युवाओं का अधिकार
युवाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए जूली ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले युवाओं से सरकारी नौकरी का वादा किया था, लेकिन अब उन्हें ‘शिक्षा वीर’ बनाकर केवल संविदा और अस्थायी भर्तियाँ परोसी जा रही हैं। 3,540 पदों पर निकाली गई हालिया भर्ती इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। इस भर्ती में न तो अनुभवी अभ्यर्थियों को कोई वेटेज दिया गया है और न ही ओवरएज हो चुके युवाओं को कोई राहत प्रदान की गई है। क्या यही भाजपा का ‘सुराज’ और रोज़गार मॉडल है? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षित युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ बंद होना चाहिए। संविदा नहीं, स्थायी रोज़गार ही राजस्थान के युवाओं का अधिकार है।
जर्जर स्कूल और गिरता प्लास्टर: डबल इंजन सरकार की विफलता का प्रमाण
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर चिंता व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि घाटोल (बांसवाड़ा) के अमरथून स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा में पढ़ रही बालिकाओं पर छत का प्लास्टर गिरना बेहद हृदयविदारक और चिंताजनक है। यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि जिम्मेदार तंत्र की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। ग्रामीणों और विद्यालय प्रशासन द्वारा बार-बार भवन की जर्जर स्थिति की सूचना देने के बावजूद सरकार ने मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत नहीं किया, जो कि अत्यंत निंदनीय है। श्री जूली ने कहा कि विद्यालय जैसे पवित्र स्थान पर ऐसी घटनाएं होना भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार की विफलता का जीता-जागता सबूत है। सरकार को प्रचार से बाहर निकलकर जर्जर स्कूलों की सुध लेनी चाहिए।

