निकाय चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका, पाली के दिग्गज नेता राकेश भाटी कांग्रेस में शामिल

News Desk

पाली। राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पाली में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री और पाली की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे राकेश भाटी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को जयपुर स्थित कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने उन्हें कांग्रेस का दुपट्टा पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। इस दौरान पाली विधायक भीमराज भाटी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह राजपुरोहित सहित कई नेता मौजूद रहे।

राकेश भाटी का कांग्रेस में जाना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे पाली की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। वह करीब 35 वर्षों तक भाजपा से जुड़े रहे और पांच बार पार्षद रह चुके हैं। उन्होंने 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 में पार्षद का चुनाव जीता। इसके अलावा वे नगर परिषद में उपसभापति और नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2007 में उन्होंने करीब साढ़े तीन महीने तक सभापति के रूप में भी काम किया था।

राकेश भाटी का राजनीतिक प्रभाव केवल नगर निकाय तक सीमित नहीं रहा। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी के प्रतिनिधि के तौर पर करीब 10 वर्षों तक काम कर चुके हैं। उनकी पत्नी रेखा भाटी पाली नगर निगम की निवर्तमान महापौर हैं। ऐसे में भाटी परिवार की पाली की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भूमिका रही है।

भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने के पीछे राकेश भाटी ने पार्टी के भीतर हुए घटनाक्रम और अपनी नाराजगी को वजह बताया है। उनका कहना है कि वह जनता से जुड़ी समस्याओं को लेकर जयपुर गए थे, लेकिन उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश की गई और उन्हें तथा उनकी पत्नी रेखा भाटी को पार्टी से निष्कासित करा दिया गया। अब उन्होंने कांग्रेस के साथ रहकर पाली के लोगों की सेवा करने की बात कही है। उनके इन आरोपों पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा।

राकेश भाटी के कांग्रेस में शामिल होने का समय भी खास है। राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवारों के चयन और संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में स्थानीय राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता का दल बदलना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। खासकर पाली में भाजपा के सामने अब अपने संगठन को एकजुट रखने और संभावित असंतोष को नियंत्रित करने की चुनौती बढ़ सकती है।

यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पाली राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह जिला है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले से पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेता का कांग्रेस में जाना भाजपा के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है। हालांकि, इस दलबदल का वास्तविक चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

दूसरी ओर कांग्रेस के लिए राकेश भाटी की एंट्री निकाय चुनाव से पहले संगठन को मजबूती देने का मौका है। पार्टी उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, स्थानीय संपर्क और नगर निकाय की राजनीति में पकड़ का इस्तेमाल चुनावी रणनीति में कर सकती है। भाटी के साथ जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों का रुख भी आने वाले चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकता है।

हाल के दिनों में राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दलों में टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन के साथ-साथ नेताओं के दल बदलने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में पाली में हुआ यह राजनीतिक बदलाव स्थानीय चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है।

Share This Article