जयपुर,। राजस्थान की राजनीति में अक्सर एक-दूसरे पर निशाना साधने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच गुरुवार को अलग तरह का संवाद देखने को मिला। गहलोत ने भजनलाल शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें मुख्यमंत्री एक बुजुर्ग महिला के साथ खाट पर बैठकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वीडियो शेयर करते हुए गहलोत ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद भी किया, हालांकि इसके साथ उन्होंने पेंशन व्यवस्था को लेकर दो सुझाव भी रख दिए।
गहलोत ने अपने पोस्ट में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद एक बुजुर्ग महिला से सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और उसके लाभ के बारे में चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया और इसी बहाने प्रदेश के बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों से जुड़ी पेंशन व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के सामने पहली मांग पेंशन के नियमित भुगतान को लेकर रखी। गहलोत का आरोप है कि मौजूदा सरकार में कई बार सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में देरी हो जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि पेंशन हर महीने की पहली तारीख को नियमित रूप से लाभार्थियों के बैंक खाते में पहुंचनी चाहिए, ताकि बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को भुगतान के लिए इंतजार न करना पड़े।
गहलोत ने दूसरी मांग केंद्र से मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा सहायता को लेकर रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम यानी NSAP के तहत मिलने वाली पेंशन राशि में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, मौजूदा 300 रुपए प्रतिमाह की केंद्रीय सहायता को बढ़ाकर 3,000 रुपए किया जाना चाहिए और इसमें केंद्र तथा राज्य सरकार की हिस्सेदारी 50-50 रखी जा सकती है।
गहलोत की पोस्ट ने राजस्थान की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के राजनीतिक सफर की ओर भी ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में इस योजना के तहत 91 लाख से ज्यादा लोग लाभ ले रहे हैं। योजना के तहत बुजुर्गों, एकल महिलाओं, दिव्यांगों और कुछ अन्य पात्र श्रेणियों को आर्थिक सहायता दी जाती है। पेंशन की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में DBT के जरिए भेजी जाती है।
राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ाई गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राज्य में 2024 में 1,000 रुपए की पेंशन को 2025 में 1,250 रुपए किया गया, इसके बाद जनवरी 2026 में इसे 1,300 रुपए और अब 1,450 रुपए प्रतिमाह तक बढ़ाया गया है। ऐसे में गहलोत की ओर से पेंशन के नियमित भुगतान और केंद्रीय हिस्से में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया जाना राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री के वीडियो को साझा करते समय गहलोत का रुख पूरी तरह राजनीतिक आलोचना वाला नहीं रहा। उन्होंने पहले मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया और फिर पेंशन व्यवस्था को बेहतर बनाने के सुझाव दिए। इससे साफ है कि पेंशन जैसा मुद्दा दोनों नेताओं के लिए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ प्रदेश के बड़े सामाजिक सरोकार से भी जुड़ा हुआ है।
राज्य में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले लाभार्थियों की संख्या को देखते हुए भुगतान की नियमितता और पेंशन राशि में बढ़ोतरी का मुद्दा आने वाले समय में महत्वपूर्ण रह सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा गहलोत के सुझावों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या सरकार पेंशन भुगतान की समयबद्ध व्यवस्था को लेकर कोई नया कदम उठाती है।