Jaipur : चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है और अब बारी जयपुर की जनता की है। राजस्थान निकाय चुनाव के दूसरे चरण में शुक्रवार, 11 सितंबर को राजधानी जयपुर के 150 वार्डों में मतदान होगा। नगर निगम के इन वार्डों में 723 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जबकि 24.33 लाख से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर शहर की अगली स्थानीय सरकार की तस्वीर तय करेंगे। मतदान को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं और गुरुवार को मतदान दलों को उनके निर्धारित केंद्रों के लिए रवाना किया जा रहा है।
जयपुर में मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। इसके लिए शहर में कुल 2,256 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन की ओर से तैयारियां की गई हैं। चुनाव प्रक्रिया के तहत मतदान के बाद सभी ईवीएम को निर्धारित स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाएगा और 14 सितंबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
इस बार जयपुर के 150 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला कई जगह देखने को मिल रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 149-149 वार्डों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि 425 उम्मीदवार निर्दलीय या अन्य दलों की ओर से चुनाव मैदान में हैं। टिकट वितरण के बाद दोनों ही प्रमुख दलों में बगावत और असंतोष की स्थिति भी देखने को मिली थी, जिसका असर कई वार्डों के समीकरणों पर पड़ सकता है।
उम्मीदवारों की संख्या के लिहाज से भी जयपुर के वार्डों में अलग-अलग तस्वीर देखने को मिल रही है। 17 वार्ड ऐसे हैं जहां केवल दो उम्मीदवार आमने-सामने हैं। इनमें वार्ड 41, 42, 45, 49, 52, 53, 60, 83, 90, 91, 94, 122, 123, 129, 131, 142 और 150 शामिल हैं। वहीं 35 वार्डों में तीन-तीन उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा उम्मीदवार वार्ड 62 में हैं, जहां कुल 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में इस वार्ड में मुकाबला बहुकोणीय होने के साथ-साथ मतों के बंटवारे के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
जयपुर में कुल 24,33,121 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें 12,61,380 पुरुष मतदाता और 11,71,649 महिला मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा 92 थर्ड जेंडर मतदाता भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इतने बड़े मतदाता वर्ग के बीच होने वाला यह चुनाव शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की जमीनी पकड़ की भी परीक्षा माना जा रहा है।
चुनाव प्रचार बुधवार शाम 6 बजे समाप्त हो गया। प्रचार के अंतिम दिन तक भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने उम्मीदवारों के पक्ष में पूरी ताकत झोंक दी। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग इलाकों में सभाएं और रोड शो किए। कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशियों के समर्थन में जनसंपर्क और चुनावी सभाओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश की। प्रचार खत्म होने के बाद अब प्रत्याशियों और उनके समर्थकों का पूरा फोकस मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क और मतदान के दिन अधिक से अधिक वोटिंग सुनिश्चित करने पर है।
प्रचार समाप्त होने के साथ ही सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों और रोड शो पर रोक लागू हो गई है। अब उम्मीदवारों के पास मतदाताओं से संपर्क के लिए सीमित समय है। चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशी अपने-अपने वार्डों में बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर चुके हैं और मतदान के दिन मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
जयपुर के इन निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। सड़क, सफाई, सीवरेज, पेयजल, ट्रैफिक, स्ट्रीट लाइट और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दे अलग-अलग वार्डों में चुनावी चर्चा के केंद्र में रहे हैं। इसके साथ ही पिछले कार्यकाल के कामकाज और पार्षदों की स्थानीय स्तर पर सक्रियता को लेकर भी मतदाताओं के बीच चर्चा रही है। ऐसे में शुक्रवार को होने वाला मतदान कई उम्मीदवारों के लिए अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की परीक्षा होगा।
प्रशासन की ओर से मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए मतदान केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। गुरुवार को मतदान दलों के रवाना होने के साथ ही चुनावी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गईं। शुक्रवार को सुबह मतदान शुरू होने के बाद धीरे-धीरे मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें देखने को मिलेंगी और शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के साथ ही सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी।
इसके बाद 14 सितंबर को मतगणना के साथ जयपुर के 150 वार्डों के परिणाम सामने आएंगे। हालांकि, नगर निगम की अगली सरकार की तस्वीर सिर्फ पार्षदों के चुनाव परिणाम से पूरी तरह साफ नहीं होगी, क्योंकि इसके बाद महापौर और उपमहापौर के चुनाव की प्रक्रिया भी होगी। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार 21 सितंबर को महापौर और 22 सितंबर को उपमहापौर का चुनाव प्रस्तावित है। ऐसे में शुक्रवार का मतदान जयपुर की स्थानीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
अब तक चुनावी मैदान में नेताओं की आवाज और प्रचार वाहनों का शोर सुनाई दे रहा था, लेकिन गुरुवार को प्रचार थमने के बाद तस्वीर बदल गई है। शुक्रवार को फैसला नेताओं के भाषणों से नहीं, बल्कि मतदाताओं के वोट से होगा। 150 वार्डों में उतरने वाले 723 उम्मीदवारों के लिए यह मतदान राजनीतिक भविष्य तय करने वाला दिन होगा, जबकि जयपुर के 24.33 लाख से ज्यादा मतदाता तय करेंगे कि अगले चरण में शहर की स्थानीय राजनीति की कमान किस दिशा में जाती है।