जोधपुर। मथानिया नगरपालिका के गठन के बाद पहली बार चेयरमैन की कुर्सी पर बैठने का मौका कांग्रेस के खाते में गया है। सोमवार को हुए चुनाव में कांग्रेस की लीला देवी ने भाजपा की इंद्रा देवी को 17-8 के अंतर से हरा दिया। 25 पार्षदों वाली नगरपालिका में बहुमत का आंकड़ा 13 था, लेकिन कांग्रेस ने उससे चार वोट ज्यादा हासिल कर लिए। जीत के बाद ढोल-नगाड़े बजे, आतिशबाजी हुई और पूर्व ओसियां विधायक दिव्या मदेरणा कार की छत पर चढ़कर समर्थकों के साथ जश्न मनाती नजर आईं।
मथानिया में पार्षद चुनाव का गणित पहले ही कांग्रेस के पक्ष में था। 25 वार्डों में कांग्रेस ने 16 सीटें, भाजपा ने 7 और निर्दलीयों ने 2 सीटें जीती थीं। यानी कांग्रेस के पास अध्यक्ष पद के लिए जरूरी 13 वोट से तीन ज्यादा पार्षद पहले से मौजूद थे। दोनों निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भी कांग्रेस प्रत्याशी को मिला और लीला देवी के खाते में 17 वोट पहुंच गए। भाजपा की इंद्रा देवी को 8 वोट मिले।
दिलचस्प बात यह है कि चेयरमैन पद के दोनों उम्मीदवार एक-दूसरे के लिए नए नहीं थे। लीला देवी और इंद्रा देवी पहले वार्ड नंबर 11 के चुनाव में भी आमने-सामने थीं। उस मुकाबले में लीला देवी ने जीत दर्ज की थी। अध्यक्ष पद की लड़ाई में भी दोनों फिर आमने-सामने आईं और इस बार भी बाजी कांग्रेस के हाथ लगी। वार्ड 11 के नतीजे में लीला देवी को 367 और इंद्रा देवी को 246 वोट मिले थे।
मथानिया का यह चुनाव सिर्फ वोटों के गणित तक सीमित नहीं रहा। नामांकन के समय से ही यहां राजनीतिक माहौल गर्म था। 31 अगस्त को नामांकन की अंतिम समय सीमा के बाद भाजपा विधायक भैराराम सियोल के रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे में मौजूद रहने को लेकर दिव्या मदेरणा ने सवाल उठाए थे। वह आरओ कार्यालय के बाहर धरने पर भी बैठी थीं। उनके आरोपों के बाद प्रशासन ने आरओ की निगरानी के लिए एडीएम की नियुक्ति की और मथानिया के सीआई को चुनाव प्रक्रिया से दूर रखने के निर्देश दिए थे। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों के अपने-अपने दावे रहे हैं।
चुनाव वाले दिन भी विवाद ने पीछा नहीं छोड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस समर्थकों की बस को नगरपालिका परिसर में ले जाने को लेकर भाजपा समर्थकों के साथ कहासुनी और झड़प की स्थिति बनी। मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। दिव्या मदेरणा ने इस दौरान भाजपा विधायक और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें चुनावी विवाद के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
फिर जब मतदान हुआ तो राजनीतिक शोर का जवाब आंकड़ों ने दिया। 25 में से 17 वोट कांग्रेस के खाते में गए और भाजपा 8 पर रुक गई। इसके बाद कांग्रेस समर्थकों ने जीत का जश्न शुरू किया। दिव्या मदेरणा का कार की छत पर चढ़कर समर्थकों के साथ जश्न मनाने का वीडियो भी चर्चा में रहा। यानी जिस चुनावी मैदान में कुछ दिन पहले आरओ कक्ष के बाहर धरना चल रहा था, वहीं नतीजे के बाद तस्वीर पूरी तरह उत्सव वाली हो गई।
मथानिया नगरपालिका का अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित था। ऐसे में कांग्रेस की लीला देवी और भाजपा की इंद्रा देवी के बीच मुकाबला केवल दो राजनीतिक दलों की टक्कर नहीं था, बल्कि नवगठित नगरपालिका के पहले बोर्ड की कमान किसके हाथ जाएगी, इसका भी फैसला था।
अब असली परीक्षा चुनाव जीतने के बाद शुरू होगी। मथानिया हाल ही में ग्राम पंचायत से नगरपालिका बना है, इसलिए पहले बोर्ड के सामने साफ-सफाई, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट और स्थानीय व्यापारिक क्षेत्रों की सुविधाओं जैसे बुनियादी मुद्दे रहेंगे। चुनाव में 17 वोट हासिल करने के बाद लीला देवी के सामने अब इन मुद्दों पर काम करके नई नगरपालिका की पहली तस्वीर बनाने की चुनौती होगी।
मथानिया निकाय चुनाव का गणित एक नजर में: 25 कुल वार्ड, कांग्रेस के 16 पार्षद, भाजपा के 7, निर्दलीय 2; अध्यक्ष पद के लिए बहुमत 13 और मतदान में लीला देवी को 17 तथा इंद्रा देवी को 8 वोट मिले।
मथानिया में कुर्सी का फैसला भले ही वोटों से हुआ हो, लेकिन चुनावी कहानी में धरना, आरोप, प्रशासनिक हलचल और आखिर में कार की छत वाला जश्न—सब कुछ शामिल रहा। अब पहली चेयरमैन के सामने राजनीतिक मुकाबले की जगह नगरपालिका चलाने की असली पारी है।