नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में अचानक विमान की ऊंचाई कम होने की घटना की जांच अब कई अहम सवालों तक पहुंच गई है। 4 अगस्त को एयरबस A320 से संचालित इस फ्लाइट में उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई करीब 300 से 360 फीट तक अचानक कम हो गई थी, जिससे कई यात्री घायल हुए थे। शुरुआत में घटना को तकनीकी समस्या से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब जांच में पायलट की नींद, उसकी दवा और ड्रग टेस्ट का मामला भी सामने आया है।
जांच के दौरान फ्लाइट के कमांडर ने बताया कि वह पिछले कुछ समय से नींद की समस्या से परेशान था। फुकेट में ठहरने के दौरान भी उसे पर्याप्त नींद नहीं मिली थी। इसके बाद उड़ान के दौरान वह करीब 30 से 35 मिनट तक सो गया। जागने के बाद वह वॉशरूम गया और फिर कॉकपिट में लौट आया। जिस समय विमान की ऊंचाई अचानक कम हुई, उस समय फर्स्ट ऑफिसर विमान उड़ा रहे थे और कमांडर उनकी निगरानी कर रहा था।
कमांडर के मुताबिक, घटना से ठीक पहले वह फर्स्ट ऑफिसर के पीछे खड़ा होकर एयर कंडीशनिंग सिस्टम को लेकर बात कर रहा था। अचानक विमान की ऊंचाई में बदलाव हुआ और कमांडर भी कॉकपिट में गिर गया। इसके बाद अब जांच अधिकारी फ्लाइट के तकनीकी रिकॉर्ड, कॉकपिट में हुई बातचीत और दूसरे डेटा की जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उस वक्त विमान में वास्तव में क्या हुआ था।
इसी जांच के बीच पायलट के ड्रग टेस्ट की रिपोर्ट ने मामले को और गंभीर बना दिया। घटना के बाद दोनों पायलटों का अनिवार्य साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट कराया गया था। कमांडर की शुरुआती जांच में रिपोर्ट सामान्य नहीं आई, जिसके बाद सैंपल को दोबारा जांच के लिए भेजा गया। कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना यानी कैनाबिस के लिए रिपोर्ट पॉजिटिव आने की बात सामने आई है।
हालांकि, यहां यह साफ करना जरूरी है कि ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने से यह साबित नहीं होता कि पायलट उड़ान के समय नशे के असर में था। जांच में यह भी देखा जाएगा कि सैंपल कब लिया गया था, पदार्थ का इस्तेमाल कब हुआ था और क्या उसका पायलट की कार्यक्षमता पर उस समय कोई असर पड़ा था। इसलिए जांच एजेंसियां फिलहाल ड्रग टेस्ट को विमान की ऊंचाई कम होने की घटना का सीधा कारण नहीं मान रही हैं।
ड्रग टेस्ट के साथ पायलट की दवा और मेडिकल स्थिति की भी जांच हो रही है। कमांडर ने पूछताछ में बताया कि वह नींद की परेशानी के लिए डॉक्टर की सलाह पर दवा ले रहा था। अब यह पता लगाया जा रहा है कि वह कौन-सी दवा ले रहा था और क्या एयरलाइन या संबंधित मेडिकल अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई थी। विमानन नियमों के तहत ऐसी दवाओं को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है, जो पायलट की सतर्कता या काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
मामले में कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि उड़ान के दौरान पायलट ने क्रू के एक सदस्य से लाइटर मांगा था। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी साफ नहीं है और जांच एजेंसियां इसके पूरे संदर्भ की भी पड़ताल कर रही हैं। इसी तरह विमान के तकनीकी सिस्टम में गड़बड़ी की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। इसलिए जांच केवल पायलट की स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि विमान के ऑटोमेशन और दूसरे सिस्टम की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल जांच एजेंसियां पायलट की नींद, दवा, ड्रग टेस्ट और विमान के तकनीकी रिकॉर्ड को एक साथ देखकर घटना की असली वजह पता लगाने में जुटी हैं। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि विमान की ऊंचाई कम होने की वजह मानवीय गलती थी, तकनीकी खराबी थी या कई कारणों का एक साथ असर हुआ। जांच पूरी होने के बाद ही इस घटना की वास्तविक वजह सामने आएगी।