राजस्थान निकाय चुनाव की उल्टी गिनती शुरू, आज जारी हो सकता है कार्यक्रम; आचार संहिता लगते ही थम जाएंगे नए विकास काम

News Desk

जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर अब इंतजार लगभग खत्म होने वाला है। राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की तैयारी में है और इसके साथ ही संबंधित शहरी निकायों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। स्वायत्त शासन विभाग ने निकायों के आरक्षण और परिसीमन से जुड़ी रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेज दी है, जिसकी अंतिम समीक्षा की जा रही है। रिपोर्ट में कोई तकनीकी या कानूनी कमी नहीं मिली तो 19 अगस्त की दोपहर या शाम तक चुनाव कार्यक्रम जारी होने की संभावना है।

चुनाव कार्यक्रम सामने आते ही संबंधित नगर निकायों की सीमा में आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएगी। इसका सीधा असर सरकार, प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से लिए जाने वाले नए फैसलों और विकास कार्यों पर पड़ेगा। आयोग की तैयारियां लगभग पूरी बताई जा रही हैं और मतदान दो चरणों में कराने की योजना पर काम चल रहा है। संभावित कार्यक्रम के अनुसार पहला चरण सितंबर के पहले सप्ताह और दूसरा चरण सितंबर के दूसरे सप्ताह में कराया जा सकता है। हालांकि, अंतिम तारीखों की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही होगी।

आचार संहिता लागू होने के बाद नए विकास कार्यों के शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण पर रोक रहेगी। सरकार और स्थानीय निकाय नए टेंडर या नए वर्क ऑर्डर जारी नहीं कर सकेंगे और मंत्री या जनप्रतिनिधि ऐसी नई योजनाओं की घोषणा भी नहीं कर पाएंगे, जिनका सीधा असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है। वहीं, जिन परियोजनाओं के वर्क ऑर्डर आचार संहिता लागू होने से पहले जारी हो चुके हैं, उन्हें जारी रखा जा सकेगा। पहले से चल रहे निर्माण कार्य भी बंद नहीं होंगे।

आम लोगों के लिए जरूरी सेवाएं हालांकि सामान्य रूप से चलती रहेंगी। सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और दूसरी आवश्यक नागरिक सुविधाओं पर आचार संहिता का असर नहीं पड़ेगा। यानी चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासन का नियमित कामकाज जारी रहेगा, लेकिन नए राजनीतिक फैसलों और विकास घोषणाओं पर नियंत्रण रहेगा।

निकाय चुनाव के बीच विधानसभा में पेश होने वाले विधेयकों को लेकर भी चर्चा है। नियमों के तहत आचार संहिता लागू होने के बाद भी विधानसभा में बिल पेश किए जा सकते हैं और जरूरी विधायी काम पूरे किए जा सकते हैं। हालांकि, सरकार ऐसे फैसलों, विज्ञापनों या प्रचार गतिविधियों से बचने के लिए बाध्य होगी, जिनसे मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश मानी जा सकती है।

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां ऐसे समय अंतिम दौर में पहुंची हैं, जब पंचायत चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश का राजनीतिक माहौल और गर्म होना तय माना जा रहा है। आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग कब आधिकारिक कार्यक्रम जारी करता है और मतदान की तारीखें क्या रहती हैं।

फिलहाल आयोग अंतिम दस्तावेजों और मतदाता सूची से लेकर बूथ और सुरक्षा व्यवस्था तक की समीक्षा कर रहा है। जैसे ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा, राजस्थान के शहरी इलाकों में चुनावी गतिविधियां तेज हो जाएंगी और राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन से लेकर प्रचार रणनीति तक अपनी तैयारियां खुलकर शुरू कर सकेंगे।

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