पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान में तेज होंगे विकास कार्य, आचार संहिता से पहले लोकार्पण-शिलान्यास पर जोर

News Desk

Jaipur : राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 की आहट के साथ ही ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से स्वीकृत और तैयार विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कराने की तैयारी में जुट गई है। माना जा रहा है कि चुनावी कार्यक्रम घोषित होने से पहले ज्यादा से ज्यादा पात्र विकास कार्यों को सूचीबद्ध कर उनके लोकार्पण और शिलान्यास की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीण विकास विभाग की ओर से सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से ऐसे विकास कार्यों का ब्योरा मांगा जा रहा है, जिन्हें चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले लोकार्पित या शिलान्यास किया जा सकता है। इसके लिए जिलों में पहले से स्वीकृत परियोजनाओं की स्क्रीनिंग की जा रही है। अधिकारियों को यह देखने के लिए कहा गया है कि कौन से काम निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं और उन्हें चुनाव से पहले कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।

सरकार की कोशिश बताई जा रही है कि जिन परियोजनाओं को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और जिनका काम पूरा हो चुका है, उनके उद्घाटन में देरी न हो। इसी तरह जिन परियोजनाओं का काम शुरू किया जाना है और जो शिलान्यास के लिए पात्र हैं, उनकी भी पहचान की जा रही है। वजह साफ है कि एक बार चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी और इसके बाद सरकार के लिए नई घोषणाओं के साथ-साथ कई तरह के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रमों पर भी प्रतिबंध लागू हो जाता है।

विकास कार्यों की सूची तैयार करने के दौरान सरकार ने पात्रता को लेकर कुछ शर्तें भी तय की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लोकार्पण के लिए संबंधित परियोजना का 100 प्रतिशत काम पूरा होना जरूरी होगा। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि संबंधित कार्य की पूर्णता मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हुई है या नहीं। यानी केवल कागजों पर पूरा दिखाए गए या अधूरे कार्यों को लोकार्पण की सूची में शामिल करने से बचने की कोशिश होगी।

इसी तरह शिलान्यास के लिए भी ऐसे ही विकास कार्यों का चयन किया जाएगा, जिनका पहले कभी शिलान्यास नहीं हुआ हो। इसका उद्देश्य उन परियोजनाओं को दोबारा शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने से रोकना है, जिनका पहले ही शिलान्यास किया जा चुका है। प्रशासनिक स्तर पर तैयार की जा रही सूची में परियोजना की स्थिति, स्वीकृति और काम की वास्तविक प्रगति जैसे पहलुओं की जांच के बाद ही उसे शामिल किए जाने की संभावना है।

पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में आरक्षण लॉटरी भी एक अहम पड़ाव है। पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव से पहले विभिन्न पदों और क्षेत्रों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जानी है। रिपोर्टों के मुताबिक, आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। जैसे ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा, संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी और इसके बाद सरकार तथा प्रशासन की गतिविधियों पर चुनावी नियमों के तहत कई तरह की पाबंदियां लागू हो जाएंगी।

यही वजह है कि सरकार के पास विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के लिए समयसीमा सीमित मानी जा रही है। जिला स्तर पर विकास कार्यों का ब्योरा जुटाने के साथ उनकी पात्रता की जांच की जा रही है। जिन कामों को निर्धारित मानकों पर सही पाया जाएगा, उन्हें चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले पूरा कराने और उनके लोकार्पण या शिलान्यास की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश होगी।

राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पंचायत चुनाव का सीधा असर स्थानीय राजनीति पर पड़ता है। ग्राम पंचायत से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर तक होने वाले चुनावों में स्थानीय मुद्दों के साथ विकास कार्य भी बड़ा चुनावी मुद्दा बनते हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले होने वाले विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रमों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नजर रहना स्वाभाविक है।

सरकार की ओर से इन कार्यक्रमों को पहले से स्वीकृत और निर्धारित विकास कार्यों को समय पर पूरा करने की प्रशासनिक प्रक्रिया के तौर पर पेश किया जा सकता है। दूसरी ओर, विपक्ष इन कार्यक्रमों को चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश के रूप में देख सकता है। हालांकि किसी विकास परियोजना के लोकार्पण या शिलान्यास का वास्तविक राजनीतिक असर क्या होगा, इसका आकलन चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने और मतदाताओं की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

फिलहाल राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 की विस्तृत तारीखों का इंतजार है। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पंचायतीराज आम चुनाव 2026 के लिए अलग सेक्शन मौजूद है, जबकि उपलब्ध रिपोर्टों में चुनाव प्रक्रिया को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने की तैयारियों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में आरक्षण प्रक्रिया और चुनाव कार्यक्रम को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

फिलहाल सरकार और प्रशासन का फोकस दो मोर्चों पर दिखाई दे रहा है—एक तरफ पंचायत चुनाव की तैयारियों से जुड़ी आरक्षण प्रक्रिया और चुनाव कार्यक्रम का इंतजार है, तो दूसरी तरफ आचार संहिता लागू होने से पहले पात्र विकास कार्यों को पूरा कर उनके लोकार्पण और शिलान्यास की तैयारी चल रही है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आएगी, ग्रामीण राजस्थान में विकास कार्यों के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है।

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