राजस्थान निकाय चुनाव में जमकर वोटिंग, दोनों चरणों में 72.95% मतदान; अब 14 सितंबर को खुलेगा नतीजों का पिटारा

News Desk

जयपुर: राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में इस बार मतदाताओं ने खासा उत्साह दिखाया। दो चरणों में हुए मतदान के बाद राज्य के 309 नगरीय निकायों में औसतन 72.95 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पहले चरण में 162 निकायों में 76.41 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जबकि दूसरे और अंतिम चरण में 147 निकायों में 70.68 प्रतिशत मतदान हुआ। अब मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की नजरें 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। इसी दिन वार्ड पार्षदों के चुनाव परिणाम सामने आएंगे और साफ होगा कि मतदाताओं का रुझान किस दल और किस उम्मीदवार के पक्ष में गया।

राजस्थान निकाय चुनाव इस बार दो चरणों में कराए गए। 9 सितंबर को पहले चरण में 162 नगरीय निकायों में मतदान हुआ। इस दौरान 76.41 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद 11 सितंबर को दूसरे चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और बीकानेर समेत 147 नगरीय निकायों में मतदाताओं ने वोट डाले। दूसरे चरण में मतदान प्रतिशत 70.68 रहा। दोनों चरणों के आंकड़ों को मिलाकर प्रदेश में कुल औसत मतदान 72.95 प्रतिशत रहा।

इस बार राज्य के कुल 309 नगरीय निकायों में चुनाव कराए गए। इनमें पहले चरण में 162 और दूसरे चरण में 147 निकाय शामिल रहे। दूसरे चरण में 6 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 121 नगर पालिकाओं में मतदान हुआ। इनमें 40 नवगठित नगरीय निकाय भी शामिल हैं, जहां पहली बार स्थानीय निकाय चुनाव हुए। नए निकायों में पहली बार मतदान को लेकर स्थानीय स्तर पर भी खासा उत्साह देखने को मिला।

दूसरे चरण में ही 61.93 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस चरण में 4,852 वार्डों के लिए 18,266 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। खास तौर पर राज्य के छह प्रमुख नगर निगमों में हुए चुनाव ने दूसरे चरण को राजनीतिक रूप से काफी अहम बना दिया। राजधानी जयपुर समेत बड़े शहरों में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला होने के कारण मतदान पर पूरे प्रदेश की नजर रही।

जयपुर नगर निगम चुनाव में करीब 63.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। राजधानी में 150 वार्डों के लिए हुए मतदान में मतदाताओं की भागीदारी 2020 के महामारी काल में हुए नगर निगम चुनावों की तुलना में अधिक रही। मतदान के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज रहीं और प्रत्याशी तथा उनके समर्थक अपने-अपने पक्ष में अधिक से अधिक मतदान कराने की कोशिश करते नजर आए।

दूसरे चरण के मतदान में सबसे ज्यादा वोटिंग बालोतरा जिले की धोरीमन्ना नगर पालिका में दर्ज की गई। यहां 91.59 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। वहीं सिरोही नगर परिषद में सबसे कम 62.03 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। इन आंकड़ों से साफ है कि अलग-अलग शहरों और कस्बों में मतदान को लेकर मतदाताओं का उत्साह एक जैसा नहीं रहा, लेकिन प्रदेश स्तर पर कुल मतदान प्रतिशत मजबूत रहा।

राजधानी जयपुर में मतदान के दौरान कुछ स्थानों पर EVM में तकनीकी दिक्कत, फर्जी मतदान के आरोप और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की घटनाएं भी सामने आईं। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों ने भी अपने-अपने स्तर पर वोटिंग पैटर्न का आकलन शुरू कर दिया है।

उच्च मतदान प्रतिशत के बीच निकाय चुनाव पूरी तरह विवादों से भी मुक्त नहीं रहे। जयपुर के अलावा बाड़मेर, बीकानेर, झुंझुनूं और अन्य जिलों से मामूली झड़पों, कहासुनी और राजनीतिक विवाद की खबरें सामने आईं। कुछ मतदान केंद्रों पर EVM में तकनीकी समस्या की शिकायतें भी मिलीं। वहीं कुछ जगहों पर फर्जी मतदान के आरोप लगाए गए। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता और उनका चुनाव परिणाम पर कोई असर पड़ा या नहीं, यह संबंधित अधिकारियों की जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

अब मतदान खत्म होने के बाद सभी की निगाहें 14 सितंबर 2026 को होने वाली मतगणना पर हैं। इसी दिन अलग-अलग नगरीय निकायों के वार्डों में चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के परिणाम सामने आएंगे। नतीजों के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत किस राजनीतिक दल के पक्ष में गया और किन उम्मीदवारों को मतदाताओं का समर्थन मिला।

राजस्थान के निकाय चुनाव में इस बार 72.95 प्रतिशत का औसत मतदान राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि, सिर्फ अधिक मतदान के आधार पर किसी दल या उम्मीदवार की जीत का अनुमान लगाना संभव नहीं है। अब असली तस्वीर 14 सितंबर को मतगणना के बाद सामने आएगी। इसके बाद ही तय होगा कि शहरी निकायों में मतदाताओं ने सत्ता पक्ष, विपक्ष या स्थानीय स्तर पर किसी नए चेहरे को अपना समर्थन दिया है।

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