राजस्थान निकाय चुनाव रिजल्ट में BJP का दबदबा, 148 निकायों में बनी सबसे बड़ी पार्टी; कांग्रेस 104 पर, अब बोर्ड गठन पर नजर

News Desk

जयपुर: राजस्थान नगर निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। राज्य के 309 शहरी स्थानीय निकायों में से BJP 148 निकायों में सबसे बड़ी पार्टी रही, जबकि कांग्रेस 104 निकायों में सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई। 10 निकायों में दोनों दल बराबरी पर रहे। चुनाव परिणामों की यह तस्वीर बताती है कि राजस्थान के शहरी इलाकों में BJP ने मजबूत प्रदर्शन किया है, लेकिन कई क्षेत्रों में कांग्रेस ने भी अपनी पकड़ बनाए रखी है। इसके अलावा कुछ निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहा है।

इन चुनावों में कुल 10,245 पार्षद पदों के लिए मुकाबला हुआ था। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल थीं। प्रदेश में निकाय चुनाव के लिए दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को मतदान कराया गया था। मतदान के बाद 14 सितंबर को मतगणना हुई, जिसके साथ अलग-अलग शहरों और निकायों में राजनीतिक तस्वीर साफ होती गई।

जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के नतीजे इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। राजधानी होने के कारण जयपुर का मुकाबला राजनीतिक तौर पर भी अहम माना गया। उपलब्ध निकायवार जानकारी के मुताबिक जयपुर नगर निगम की मतगणना के दौरान स्थिति अपडेट होती रही। वहीं जयपुर जिले के दूसरे निकायों में BJP और कांग्रेस दोनों ने कई जगह जीत दर्ज की और स्थानीय स्तर पर अलग-अलग समीकरण देखने को मिले।

जयपुर जिले की उपलब्ध सूची के अनुसार बगरू, बस्सी, चाकसू, चौमूं, जमवारामगढ़, कालाडेरा, किशनगढ़-रेनवाल, फुलेरा, सांभर और वाटिका जैसे निकायों में BJP को बढ़त या जीत मिली। दूसरी ओर दूदू, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नारायणा, फागी और शाहपुरा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी रही। जॉबनेर में निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन मजबूत रहा। इससे साफ है कि जयपुर जिले में भी मुकाबला केवल BJP और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं रहा, बल्कि कई जगह स्थानीय उम्मीदवारों और क्षेत्रीय समीकरणों ने परिणाम को प्रभावित किया।

राजस्थान के प्रमुख नगर निगमों की बात करें तो यहां भी तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। उपलब्ध निकायवार आंकड़ों के अनुसार अजमेर नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी रही, जबकि अलवर और भीलवाड़ा में BJP ने बढ़त बनाई। बीकानेर में कांग्रेस और उदयपुर नगर निगम में BJP सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई। वहीं जोधपुर और कोटा नगर निगम के लिए उपलब्ध अपडेट में मतगणना जारी बताई गई थी। पाली नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी रही।

इस तरह राज्य के बड़े शहरी केंद्रों में BJP ने कई जगह मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन कांग्रेस भी कई महत्वपूर्ण निकायों में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रही। यही वजह है कि कुल 309 निकायों का आंकड़ा BJP के पक्ष में होने के बावजूद अलग-अलग शहरों में स्थानीय परिणामों की तस्वीर काफी अलग दिखाई दे रही है।

इन चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी खासा महत्वपूर्ण रहा। खासतौर पर डीग जिले के ब्रजनगर, डीग, कामां, कुम्हेर और पहाड़ी समेत कई निकायों में निर्दलीय उम्मीदवार सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आए। इसी तरह झुंझुनूं जिले के कई निकायों में भी निर्दलीय उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन किया। ऐसे परिणामों वाले निकायों में बोर्ड गठन के दौरान निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

निकाय चुनाव के नतीजों का असली राजनीतिक असर अब बोर्ड गठन के दौरान दिखाई देगा। पार्षदों के परिणाम आने के बाद मेयर, सभापति और चेयरमैन पदों के चुनाव पर सभी की नजर है। उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक मेयर और चेयरपर्सन के चुनाव 21 सितंबर को, जबकि डिप्टी मेयर, डिप्टी चेयरपर्सन और नगर निकायों के उपाध्यक्ष पदों के चुनाव 22 सितंबर को होने हैं।

यानी चुनावी मुकाबला पार्षदों के नतीजों के साथ पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई ऐसे निकाय हैं जहां किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में BJP और कांग्रेस दोनों को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक जोड़तोड़ और पार्षदों के समर्थन को लेकर गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

309 निकायों में 148 जगह सबसे बड़ी पार्टी बनना BJP के लिए राजस्थान के शहरी राजनीतिक आधार के लिहाज से महत्वपूर्ण प्रदर्शन है। खासतौर पर ऐसे समय में जब राज्य में BJP सरकार है और निकाय चुनावों को सरकार के कामकाज और संगठन की जमीनी पकड़ के लिहाज से भी देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस का 104 निकायों में सबसे बड़ा दल बनना यह संकेत देता है कि विपक्ष ने भी कई शहरी क्षेत्रों में BJP को कड़ी चुनौती दी है।

इन नतीजों में स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ स्थानीय संगठन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। निकाय चुनाव विधानसभा या लोकसभा चुनाव की तरह पूरी तरह राज्य या राष्ट्रीय मुद्दों पर आधारित नहीं होते। वार्ड स्तर पर उम्मीदवार की छवि और स्थानीय समीकरण कई बार पार्टी के व्यापक प्रदर्शन से अलग परिणाम दे सकते हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों का कई जगह मजबूत प्रदर्शन भी इसी स्थानीय राजनीति की अहमियत को दिखाता है।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन निकायों को लेकर है जहां BJP या कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी तो बनी है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर है। ऐसे निकायों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख दल अपने-अपने बोर्ड बनाने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे। इसके साथ ही मेयर और सभापति के चुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज होंगी।

कुल मिलाकर राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने शहरी राजनीति में BJP को बढ़त जरूर दी है, लेकिन कांग्रेस भी कई क्षेत्रों में मजबूत स्थिति में है। अब 21 और 22 सितंबर को होने वाले बोर्ड गठन और मेयर-सभापति चुनाव यह तय करेंगे कि इन नतीजों का वास्तविक राजनीतिक फायदा किस दल को कितना मिलता है। कई जगह निर्दलीयों की भूमिका इस पूरे समीकरण में निर्णायक साबित हो सकती है।

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