अखिल भारतीय श्री जैन दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा आई एम सेठिया ने माधव नगर भीलवाड़ा स्थित दिवाकर धाम परिसर का समाजसेवी राजेंद्र कुमार सामर, प्रकाश चंद्र बाबेल,सुरेन्द्र मेहता, शांति लाल बाबेल सहित समाजजनो के साथ अवलोकन कर संथारा साधिका पूज्य साध्वी चरण प्रज्ञा जी की समाधि स्थल और परिसर में स्थित शिव मंदिर के दर्शन कर भीलवाड़ा नगर विकास न्यास द्वारा परिसर को सीज करने की कार्यवाही को गलत बताते हुए इसे अतिक्रमण नही बल्कि विशुद्ध धार्मिक आस्था का प्रतीक और साधु संतों के विहार के दौरान उनके विश्राम के लिए विहार धाम के रूप में उपयोग के लिए प्रमुख स्थल होना बताया
डा सेठिया के अनुसार यह दिवाकर भवन कोई सरकारी भूमि पर नयायज अतिक्रमण कर के नही बनाया गया बल्कि पूज्य संथारा साधिका साध्वी श्री चरणप्रज्ञा के 87 दिन का संथारा पूर्ण होने पर उनकी स्मृति को चिर स्थाई बनाने के लिए उदयपुर के अशोक दोषी परिवार द्वारा आराजी संख्या 508 व 509 से संबंधित 24490 वर्ग फीट भूमि दान पत्र दिनांक 29 सितंबर,2008 के करिए समाज को धार्मिक और जनऊपयोगी हितार्थ सार्वजनिक घोषणा कर उपलब्ध कराई गई तथा दान पत्र के अनुसार दान के वक्त उक्त भूमि पर एक मंदिर,5 कमरे,1रसोई,2लैटिन 1 स्नानघर, 2 बरामदे एक हाल का उल्लेख किया गया है जिसका उल्लेख रेवेन्यू रिकॉर्ड जमाबंदी में भी किया गया हे व इसको 22 अक्टूबर 2008 को सहकारी विभाग भीलवाड़ा द्वारा पंजीकृत संस्था को सुपुर्द किया जाकर समिति द्वारा अवश्य रखरखाव मरम्मत आदि कराया जाकर जिस उद्देश्य से दान किया गया उस प्रयोजनार्थ संस्था ने दायित्व निर्वहन किया।
नगर विकास न्यास को भूमि व उस पर निर्मित भवन की जानकारी न्यास के रिकॉर्ड पर होने के बावजूद मात्र एक शिकायतकर्ता के दबाव में अतिक्रमण मान कर बिना नोटिस और पूर्व सूचना के भवन सीज करने की अवेधानिक कार्यवाही की गई जिसके खिलाफ न्यायिक व प्रशासनिक कार्यवाही के जरिए उचित कार्यवाही की का रही हे।
डा सेठिया के अनुसार अवेधानिक कार्यवाही सहित पूरे प्रकरण की जानकारी स्थानीय सभी राजनेतिक व प्रशासनिक नेतृत्व के साथ ही राज्य के उच्च स्तरीय राजनेतिक नेतृत्व और प्रशासनिक तंत्र को भी अवगत करा दिया गया हे और यह भी अवगत कराया गया की 2010 से समिति के नाम विद्युत कनेक्शन वाले इस परिसर का पट्टा जारी कर नियमन करने हेतु नगर विकास न्यास में आवश्यक आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था लेकिन न्यास ने आज तक कोई कार्यवाही नहीं की और न ही नियमन प्रस्ताव को राज्य सरकार को आवश्यक दिशानिर्देश के लिए प्रेषित किया गया जो सरासर गलत प्रतीत होता हे।
संस्था द्वारा परिसर का कोई व्यक्तिगत उपयोग नही किया गया तथा संस्था के आय व्यय का अंकेक्षण भीं नियमित कराया गया है।
संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा सेठिया ने कुछ व्यक्तियों द्वारा गलत जानकारी देकर प्रशासन और आम जन को भ्रमित करने के प्रयासों कि निंदा करते हुए सामाजिक संस्थाओं के भूमि भवन के लिए इस प्रकार अनावश्यक शिकायत किया जाना यदि परंपरा बन गई तो यह सभी समाज के गलत परम्परा के साथ सरदर्द बन जायेगी।
डा सेठिया के अनुसार विगत 18 वर्षो में पूज्य आचार्य शिव मुनि,महाश्रमण जी, राष्ट्र संत तरुण सागर जी, पुलक सागर जी,साध्वी कनक प्रभा जी,युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी,उपाध्याय मूल मुनि सहित सैकड़ों साधु संतो का पदार्पण हो चुका हे तथा सर्व समाज के लोगो ने व्याख्यान सुन कर धर्मलाभ लिया और यह परिसर में स्थित शिव मंदिर की भी सम्पूर्ण देखरेख समिति द्वारा ही की जाती रही हे।
डा सेठिया सहित संस्था अध्यक्ष सुरेन्द्र सुराणा, महामंत्री शांति लाल बाबेल, राजेंद्र कुमार सामर ने आमजन से भ्रमित नही होने की अपील करते हुए इस पवित्र परिसर को अतिक्रमण के बजाय धार्मिक आस्था का केंद्र के नाते उचित सम्मान प्रदान करे

