रांची। झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। युवा नेता देवेंद्र नाथ महतो पिछले 11 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद रांची के सदर अस्पताल में भर्ती हैं। इसके बावजूद उन्होंने अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया है। अस्पताल से जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि जब तक अभ्यर्थियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
देवेंद्र महतो ने कहा कि शरीर अस्पताल में है, लेकिन छात्रों के अधिकार की लड़ाई नहीं रुकी है। उन्होंने आंदोलन कर रहे युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए साफ किया कि सरकार जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे।
वहीं रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे छात्रों ने भी सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। छात्र नेताओं का कहना है कि वे पिछले करीब तीन सप्ताह से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर अब आंदोलन को पूरे झारखंड में बड़े ‘मास मूवमेंट’ में बदला जाएगा।
छात्रों ने 10 अगस्त के विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। छात्र नेताओं ने मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत करने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की है।
अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग JSSC-CGL परीक्षा में कथित धांधली की CBI जांच है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच दूसरी एजेंसियों से कराए जाने के बावजूद आंदोलनकारी छात्र CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
छात्र नेताओं का कहना है कि आंदोलन किसी राजनीतिक दल के दबाव में नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के मुद्दे पर चल रहा है। उनका कहना है कि अगर सरकार जल्द उनकी मांगों पर फैसला नहीं लेती है तो आंदोलन को जिला स्तर से लेकर पूरे राज्य तक विस्तार दिया जाएगा।
फिलहाल देवेंद्र महतो का अनशन जारी है और छात्रों ने भी आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है। ऐसे में सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन और व्यापक रूप लेता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।