झारखंड। झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच कर रही CID के सामने चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। JPSC मेधा घोटाला मामले में गिरफ्तार अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी के पूछताछ में दिए बयान के मुताबिक, JSSC CGL परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कर 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये वसूले गए। इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले 65 सवालों के जवाब रटवाए गए थे। सिर्फ बोकारो में इस तरह करीब 1.80 करोड़ रुपये की वसूली का दावा किया गया है।
अभय तिवारी परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL का तत्कालीन मार्केटिंग मैनेजर था। उसके बयान के अनुसार, प्रश्नपत्र और उत्तर उसे प्रिंटिंग एजेंसी वेबेल से मिले थे। इसके बाद बोकारो में 15 अभ्यर्थियों को एक जगह बुलाकर परीक्षा से पहले 65 सवालों के जवाब याद करवाए गए। इस दौरान वेबेल के मालिक मिथिलेश सिंह और उसके सहयोगी राकेश सिंह की मौजूदगी का भी जिक्र जांच में सामने आया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि अभय तिवारी ने इसी JSSC CGL परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल की थी और बाद में गोड्डा में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर तैनात हुआ। उसके भाई अक्षय तिवारी और भाई की पत्नी सुषमा कुमारी का भी इसी परीक्षा में चयन हुआ था। इससे जांच एजेंसी अब कथित पेपर लीक से लाभ पाने वाले अन्य अभ्यर्थियों और पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
वहीं, JPSC की 11वीं और 13वीं परीक्षा को लेकर भी कथित ‘रेट कार्ड’ सामने आया है। अभय तिवारी के बयान के मुताबिक, PT पास कराने के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से करीब 5 लाख और SC/ST अभ्यर्थियों से 2 से 3 लाख रुपये लिए जाते थे। अंतिम चयन के लिए 60 से 70 लाख रुपये तक और इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के नाम पर करीब 15 लाख रुपये अलग से लेने का दावा किया गया है।
पूछताछ में JPSC के पूर्व पदाधिकारियों, पूर्व सदस्यों, कोचिंग संचालकों और बिचौलियों के कथित गठजोड़ की जानकारी भी सामने आई है। आरोप है कि अभ्यर्थियों से पैसों की वसूली और लेनदेन का काम बिचौलियों, सहायकों और आयोग से जुड़े कर्मचारियों के जरिए किया जाता था। जांच में CDPO जैसी अन्य परीक्षाओं में भी पैसे लेकर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
इस पूरे मामले में एक अहम कड़ी परीक्षा संचालन और प्रश्नपत्र की छपाई से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका को माना जा रहा है। अभय तिवारी के बयान के अनुसार, TDPL को काम से हटाए जाने के बाद परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबेल को मिली थी। इसी दौरान प्रश्नपत्र और उसके उत्तर तक कथित तौर पर पहुंच बनाई गई। अब CID इस बात की जांच कर रही है कि प्रश्नपत्र किस स्तर पर लीक हुआ और इसमें कौन-कौन लोग सीधे तौर पर शामिल थे।
इन खुलासों के बाद झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर छात्र पहले से ही आंदोलन कर रहे हैं और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में धांधली से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
फिलहाल CID की जांच आगे बढ़ रही है और अभय तिवारी के बयान में सामने आए दावों की पुष्टि की जा रही है। जांच एजेंसी अब कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क, पैसों के लेनदेन और इससे फायदा उठाने वाले लोगों की भूमिका खंगाल रही है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो इस मामले में आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।