सिटी की चेयर और सीईओ जेन फ्रेजर ने पीएम मोदी से की मुलाकात, वैश्विक निवेश में साझेदारी को गति देने पर जोर

News Desk

मुंबई। सिटी की चेयर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेन फ्रेजर ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर देश की आर्थिक वृद्धि और विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में सिटी की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में भारत में वैश्विक निवेश आकर्षित करने, भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार का समर्थन करने और वैकल्पिक ऊर्जा तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रखा गया। उच्च स्तरीय यह वार्ता वैश्विक बैंकिंग संस्थाओं के भारत में निवेश के प्रति विश्वास और सरकार के सुधारवादी एजेंडे के साथ संरेखण का संकेत है।

मुलाकात में प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को तेज आर्थिक विकास और निवेश वृद्धि के माध्यम से हासिल करने की अपनी आकांक्षा दोहराई। उन्होंने इसमें निजी क्षेत्र, विदेशी पूंजी और बहुराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की भूमिका को अहम बताया और बताया कि कैसे नीतिगत सुधार और स्थिर नियामकीय माहौल निवेश को आकर्षित कर सकते हैं। जेन फ्रेजर ने इस मौके पर सिटी की ओर से भारत में निवेश बढ़ाने और भारतीय उद्यमों को वैश्विक मंचों पर मजबूती से स्थापित करने के लिए उपलब्ध संसाधन और अनुभव साझा करने का आश्वासन दिया।

दोनों पक्षों ने भारत में वैश्विक निवेश आकर्षित करने के रणनीतिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की। सिटी ने सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 3 से 5 जून 2026 तक मुंबई में 1,500 से अधिक ग्राहकों और निवेशकों की मेजबानी करने का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य वैश्विक पूंजी और निवेश समुदाय को भारत में उपलब्ध अवसरों के बारे में जागरूक करना और डायरेक्ट निवेश से जुड़े द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समन्वय को बल देना है। फ्रेजर ने कहा कि ऐसा प्लेटफॉर्म निवेशकों और नीति निर्माताओं के बीच भरोसा और संवाद पैदा करता है, जिससे दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को स्थायित्व मिलता है।

बैठक के दौरान वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य हरित प्रौद्योगिकियों में निवेश के अवसरों पर दोनों पक्षों ने सामंजस्य खोजने की आवश्यकता पर सहमति जताई। भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता और हरित उर्जा में तेजी से घटती लागत को देखते हुए सिटी ने परियोजनाओं के वित्तपोषण, हेजिंग समाधान और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने के लिए वित्तीय उत्पादों की भूमिका पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में कहा कि ग्रीन फाइनेंस और क्लाइमेट-फ्रेंडली परियोजनाओं को आसान और सुलभ वित्तपोषण उपलब्ध करवाकर विकास एवं रोजगार दोनों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े विषयों पर भी वार्ता केंद्र में रहे। फ्रेजर और मोदी ने एआई के आर्थिक निहितार्थ, उत्पादकता बढ़ाने में उसकी भूमिका और नियामकीय चुनौतियों पर विचार किया। सिटी ने संकेत दिया कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में एआई का समावेश न केवल ग्राहक अनुभव बेहतर करेगा बल्कि जोखिम प्रबंधन और परिचालन दक्षता में भी सुधार लाएगा। साथ ही, दोनों पक्षों ने सुरक्षित और जवाबदेह एआई विकास के लिए स्पष्ट नियामक ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि प्रौद्योगिकीय नवाचार और उपभोक्ता सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे।

सिटी के भारत सीईओ एवं बैंकिंग प्रमुख तथा इंडियन सबकॉन्टिनेंट सब-क्लस्टर प्रमुख के. बालासुब्रमण्यन भी इस बैठक में मौजूद थे। उन्होंने सिटी की भारत में लगभग 125 वर्षों की उपस्थिति और योगदान पर गर्व व्यक्त किया तथा बैंक की हालिया प्रगति और भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। सिटी ने देश में विस्तृत ग्राहक आधार, कॉर्पोरेट बैंकिंग क्षमताओं और वैश्विक नेटवर्क के जरिए भारतीय उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की अपनी तत्परता जताई। बैंक ने यह भी बताया कि वह तकनीक और विविध वित्तीय उत्पादों के माध्यम से छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने पर ध्यान दे रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी और फ्रेजर के संवाद ने यह भी दर्शाया कि भारत में किया जा रहा वित्तीय सुधार और बैंकिंग क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन विदेशी संस्थानों का भरोसा बढ़ाने में मददगार रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा उठाये गये कई कदमों — चाहे वे नियामकीय सरलता से जुड़े हों या वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने वाले उपाय — ने बैंकिंग सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और पारदर्शिता को बढ़ाया है। सिटी जैसी अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं का भरोसा और सहभागिता विदेशी निवेश के प्रवाह को मजबूत कर सकती है और व्यापक आर्थिक लाभ सुनिश्चित कर सकती है।

सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोजित बैठकों और पैनल चर्चाओं से भारत-विदेश निवेश बहस को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इस कॉन्फ्रेंस के जरिए विपुल निवेशकों और वित्तीय विशेषज्ञों के साथ नीति निर्माताओं के बीच संवाद सुदृढ़ होगा, जो नीतिगत सुधारों को व्यावहारिक रूप में लागू करने और बड़े निवेश सौदों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इसके अलावा, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान परियोजनाओं के लिए कस्टमाइज्ड फाइनेंसिंग समाधानों पर काम कर सकते हैं, जिससे विशेष क्षेत्रों जैसे ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा।

यह बैठक न केवल सिटी की भारत के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, बल्कि यह वैश्विक निवेश समुदाय और भारतीय नीति निर्माताओं के बीच विश्वास के एक मजबूत पुल का संकेत भी है। अगले वर्ष 2027 में सिटी भारत में अपनी 125 वर्ष की मौजूदगी पूरी करेगा, जो कंपनी की दीर्घकालिक भागीदारी और स्थानीय बाजार में उसके योगदान का जश्न मनाने जैसा होगा। ऐसे में आने वाले वर्षों में वित्तीय सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी और हरित निवेश के नए अवसर और भी उभरने की संभावना है, जो भारत के विकास लक्ष्यों के साथ मेल खाएंगे और आर्थिक विस्तार को गति देंगे।

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