नाथद्वारा में BJP को बड़ा झटका? अपने ही प्रत्याशी ने कांग्रेस के समर्थन में वोट मांगने का किया ऐलान

News Desk

Rajsamand : नाथद्वारा नगरपालिका चुनाव में मतदान से ठीक पहले सियासी माहौल गरमा गया है। वार्ड 23 से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी दिनेश प्रजापत ने ऐसा बयान दिया है, जिसने स्थानीय चुनावी समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। प्रजापत ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में वोट मांगने की बात कही है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार को खुद से अधिक योग्य बताते हुए उसके पक्ष में मतदान की अपील करने की बात कही।

मीडिया से बातचीत के दौरान दिनेश प्रजापत ने दावा किया कि भाजपा की ओर से उनका नामांकन जल्दबाजी में करवाया गया था। उनके मुताबिक, वह नामांकन वापस लेने के लिए पहुंचे थे, लेकिन वहां हुए घटनाक्रम के बाद वह अपना नामांकन वापस नहीं ले सके। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करने का फैसला किया और कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में खड़े होने की बात कही।

पूरा मामला 3 सितंबर को नामांकन वापसी की अंतिम तारीख से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, दिनेश प्रजापत के नामांकन वापस लेने की सूचना सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ता उन्हें रोकने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। मामला बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दिनेश प्रजापत को अपने साथ ले गई।

प्रजापत ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें कई घंटों तक वाहन में घुमाती रही। उन्होंने नामांकन वापसी की प्रक्रिया और उस दिन हुए घटनाक्रम को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। हालांकि, पुलिस द्वारा उन्हें वाहन में घुमाए जाने और पूरे घटनाक्रम को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में पुलिस और भाजपा संगठन का पक्ष सामने आना भी बाकी है।

मतदान से ठीक पहले भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी का कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन में खुलकर सामने आना वार्ड 23 के चुनाव को खासा दिलचस्प बना रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों में वार्ड स्तर के समीकरण काफी अहम होते हैं और प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ भी नतीजों पर असर डाल सकती है। ऐसे में दिनेश प्रजापत के बयान का कांग्रेस प्रत्याशी को कितना फायदा मिलता है और भाजपा के चुनावी समीकरण पर इसका कितना असर पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।

इस घटनाक्रम ने भाजपा के भीतर प्रत्याशी चयन और संगठनात्मक समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय चुनावों में टिकट वितरण के बाद असंतोष और बगावत की स्थिति राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बनती रही है। वार्ड 23 में सामने आया घटनाक्रम भी इसी तरह की अंदरूनी खींचतान की चर्चा को हवा दे रहा है। भाजपा के लिए अब अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट रखना बड़ी चुनौती हो सकती है।

वहीं, कांग्रेस के लिए भाजपा प्रत्याशी का यह बयान चुनावी तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस इस घटनाक्रम को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि, महज एक प्रत्याशी के बयान से मतदाताओं के रुख में कितना बदलाव आता है, इसका आकलन मतदान और चुनाव परिणाम के बाद ही किया जा सकेगा।

नाथद्वारा नगरपालिका चुनाव में अब मतदान का समय नजदीक है और ऐसे में वार्ड 23 का मुकाबला पहले से अधिक चर्चा में आ गया है। दिनेश प्रजापत के कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में वोट मांगने के ऐलान के बाद अब नजर इस बात पर है कि उनका यह सार्वजनिक रुख मतदान के दिन कितना असर डालता है। साथ ही यह भी देखना होगा कि भाजपा इस घटनाक्रम के बाद अपने संगठन और कार्यकर्ताओं को किस तरह साधती है और वार्ड 23 में चुनावी नतीजे किसके पक्ष में जाते हैं।

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