Parliament Monsoon Session: मानसून सत्र का आखिरी दिन भी हंगामेदार, ‘चोर आया’ के नारों से गूंजा परिसर, NEET और छात्र मुद्दे पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

News Desk

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन भी हंगामे और सियासी टकराव के बीच बीता। सत्र की समाप्ति से पहले संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा मामले को लेकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ ‘चोर आया, चोर आया’ के नारे लगाए। दूसरी ओर, NEET और छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी। दिनभर चले आरोप-प्रत्यारोप के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही आखिरकार अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

राम मंदिर से जुड़े चंदे के मामले को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन करते हुए सरकार से जवाब मांगा। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर संसद के प्रति कथित अनादर का आरोप लगाया। हालांकि, चंदे से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति और किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक जिम्मेदारी का फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकता है।

इसी बीच NEET और छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा भी संसद में लगातार गर्माता रहा। विपक्षी दल छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सरकार से जवाब मांगते रहे। सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही और कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन चर्चा के तरीके और समय को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई।

इस मुद्दे पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी को घेरा। उन्होंने कहा कि जब गृह मंत्री विपक्ष के सवाल सुनने और जवाब देने के लिए तैयार थे, तो राहुल गांधी पीछे क्यों हटे। उन्होंने झारखंड में छात्रों से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर छात्र मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार के रुख पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र 19 दिन चला और सरकार के पास 25-26 दिन का समय था, लेकिन NEET और छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की पहल पहले क्यों नहीं की गई। खरगे ने वंदे मातरम् और जन गण मन को लेकर चल रही बहस पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अब इन मुद्दों को सामने लाकर जनता का ध्यान दूसरे सवालों से हटाने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने भी सरकार पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग स्पष्ट है और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री को महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी रोज संसद पहुंचते हैं, इसलिए उनके संसद नहीं आने का आरोप सही नहीं है।

दूसरी ओर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष पर संसद का माहौल खराब करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष कभी चर्चा की मांग करता है और कभी जवाब की, जिससे उसकी मांगें स्पष्ट नहीं नजर आतीं। कंगना ने कहा कि संसद में गंभीर मुद्दों पर बहस होनी चाहिए और सदन की कार्यवाही बाधित करने से जनता के सवालों का समाधान नहीं होगा।

सत्र के आखिरी दिन वंदे मातरम् और जन गण मन को लेकर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी रही। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राजनीतिक मुद्दों को उठाकर संसद की कार्यवाही प्रभावित करने के आरोप लगाए। आखिरकार लोकसभा और राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

मानसून सत्र खत्म होने के साथ संसद की कार्यवाही तो थम गई, लेकिन NEET, छात्र आंदोलन, राष्ट्रीय गीत और मंदिर चंदे जैसे मुद्दों पर राजनीतिक टकराव खत्म होता नजर नहीं आ रहा। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

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