New Delhi : कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी तेज होती दिख रही है। पार्टी के AICC सचिवों के स्तर पर व्यापक फेरबदल किए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा करीब 64 AICC सचिवों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी और इनमें से लगभग 50 फीसदी नेताओं को नई जिम्मेदारियों से हटाकर नए चेहरों को मौका देने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, बदलाव को लेकर अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व की ओर से लिया जाना बाकी है।
संभावित फेरबदल से पहले पार्टी ने नए चेहरों की तलाश और उनकी संगठनात्मक क्षमता परखने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पिछले एक सप्ताह के दौरान करीब 130 नेताओं के इंटरव्यू लिए गए हैं। इस प्रक्रिया में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और AICC महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल की भूमिका अहम बताई जा रही है।
AICC सचिव पद के संभावित उम्मीदवारों के इंटरव्यू अलग-अलग बैच में किए गए। एक बैच में करीब 12 से 14 नेताओं को शामिल किया गया। शुरुआत में उम्मीदवारों से उनका संक्षिप्त परिचय लिया गया और इसके बाद उनके राजनीतिक सफर, संगठन में निभाई गई भूमिकाओं, उपलब्धियों और कमजोरियों से जुड़े सवाल पूछे गए।
नेताओं से यह भी जानने की कोशिश की गई कि अगर उन्हें AICC सचिव के तौर पर जिम्मेदारी दी जाती है तो वे संगठन को जमीनी स्तर पर कैसे मजबूत करेंगे। खास तौर पर उन राज्यों को लेकर उम्मीदवारों की रणनीति पर सवाल किए गए, जहां कांग्रेस लंबे समय से कमजोर स्थिति में है या जहां आने वाले समय में चुनाव होने हैं।
इंटरव्यू के दौरान संभावित सचिवों के सामने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियां रखकर उनकी निर्णय लेने की क्षमता भी परखी गई। उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें किसी ऐसे राज्य की जिम्मेदारी मिलती है जहां पार्टी संगठन कमजोर है, कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी है या चुनाव नजदीक हैं, तो वे संगठन को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाएंगे।
इसके अलावा संबंधित राज्यों की स्थानीय राजनीति, वहां कांग्रेस के सामने मौजूद संगठनात्मक चुनौतियों और पार्टी को चुनावी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति को लेकर भी उम्मीदवारों की समझ जांची गई। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी सिर्फ राजनीतिक अनुभव के आधार पर नए सचिव चुनने के बजाय उनकी संगठन चलाने और जमीन पर काम करने की क्षमता को भी महत्व दे रही है।
इस चयन प्रक्रिया में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ को भी अहम मुद्दे के तौर पर शामिल किया गया है। संभावित सचिवों से यह जानने की कोशिश की गई कि वे संगठन के पुनर्गठन में किस तरह योगदान दे सकते हैं और बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक पार्टी की गतिविधियों को कैसे सक्रिय किया जा सकता है।
कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में AICC सचिवों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पार्टी में फिलहाल करीब 64 AICC सचिव बताए जा रहे हैं, जिनमें से अधिकांश को अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। ये नेता संबंधित राज्यों में AICC महासचिव या प्रभारी के साथ मिलकर प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक कामकाज में सहयोग करते हैं। कुछ सचिवों को दिल्ली स्थित पार्टी संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी दी गई हैं।
अब मौजूदा सचिवों के प्रदर्शन का भी आकलन किए जाने की तैयारी है। पार्टी नेतृत्व उनके संबंधित राज्यों में कामकाज, संगठन के साथ समन्वय और राजनीतिक गतिविधियों में भूमिका को देखते हुए आगे का फैसला कर सकता है। इसी समीक्षा के आधार पर यह तय होने की संभावना है कि किन नेताओं को मौजूदा जिम्मेदारी पर बनाए रखा जाए और किनके स्थान पर नए चेहरों को मौका दिया जाए।
संभावित बदलाव के दायरे में हाल ही में संगठन में नई जिम्मेदारी या पदोन्नति पाने वाले नेता भी आ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सप्ताह में करीब छह-सात नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इन नेताओं की भूमिका और प्रदर्शन को भी अंतिम फेरबदल के दौरान ध्यान में रखा जा सकता है।
कांग्रेस की यह कवायद ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी संगठन को बूथ स्तर से मजबूत करने और राज्यों में अपनी राजनीतिक जमीन फिर से तैयार करने पर जोर दे रही है। ऐसे में AICC सचिवों के स्तर पर बदलाव को संगठन में नई ऊर्जा और नई कार्यशैली लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा 64 सचिवों में से कितने नेताओं को वास्तव में बदला जाएगा। करीब 50 फीसदी बदलाव की बात फिलहाल सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है। इंटरव्यू और प्रदर्शन समीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कांग्रेस नेतृत्व नए सचिवों और संभावित फेरबदल को लेकर अंतिम निर्णय लेगा।